पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को वीरवार को उसके ही विधायकों ने कटघरे में ला खड़ा किया। इंडोर स्टेडियम आवंटन के मामले में भेदभाव और अनदेखी का आरोप लगाते हुए कठुआ से भाजपा के विधायक राजीव जसरोटिया, चिनैनी से विधायक दीनानाथ भगत और उधमपुर से निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता सरकार के खिलाफ वेल में आकर प्रदर्शन किया।
राजीव जसरोटिया और नीलम लंगेह समेत कुछ विधायक इस मुद्दे पर बाद में वाकआउट भी कर गए। इन विधायकों का आरोप है कि इनडोर स्टेडियम के आवंटन में जम्मू से भेदभाव किया गया है।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक शक्तिराज परिहार द्वारा पूछे गए सवाल का मंत्री जवाब दे ही रहे थे कि बीच में ही भाजपा विधायक राजीव जसरोटिया सीट से खड़े हो गए और कठुआ को इंडोर स्टेडियम न दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार पर बरस पड़े। अन्य भाजपा विधायकों ने भी उनका समर्थन किया। इसी दौरान नीलम लंगेह ने वेल में पहुंचकर नाराजगी जताई और फिर वाकआउट कर गए।
एक साल में सब कुछ करना संभव नहीं
उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह
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उधमपुर से निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता, भाजपा के राजीव जसरोटिया और दीनानाथ भगत सहित अन्य वेल में उतर आए और प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जसरोटिया ने स्पीकर से कहा कि सरकार न आपके निर्देश सुनती है न ही हमारी बात। यह क्या मजाक है।
हंगामे में कांग्रेस और नेकां के विधायक भी शामिल हुए। नेकां विधायक अली मोहम्मद सागर ने कहा कि अगर सरकार भाजपा के विधायकों की नहीं सुनती, तो हमारी क्या सुनेगी। इस बीच, कांग्रेस के विकार रसूल ने कहा कि जम्मू को अधिकारों से वंचित रखा गया है।
प्रश्नकाल के दौरान सवालों के जवाब देने के लिए खड़े भाजपा के मंत्री सुनील कुमार शर्मा पर बरसते हुए राजीव जसरोटिया ने कहा कि मुझे जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) मीटिंग में भी इस बात का आश्वासन दिलाया गया था। लेकिन, कुछ नहीं हुआ। जसरोटिया ने कहा, क्या मैं अब विशेषाधिकार प्रस्ताव सदन में लाऊं? इसके बाद सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर वे वाकआउट कर गए।
उनके बाद कांग्रेस विधायक जीएम सरूरी भी वाकआउट कर गए। गौरतलब है कि सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में कुल 12 इंडोर स्टेडियम स्थापित किए जाने हैं। इनमें जम्मू को तीन (बिलावर, सांबा और कोटरंका), लद्दाख को दो, जबकि कश्मीर को सबसे ज्यादा सात स्टेडियम मिले हैं।
हंगामे को बढ़ता देख उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने हस्तक्षेप किया और विधायकों की शिकायतों का जवाब देते हुए कहा कि अर्से से खेल क्षेत्र राज्य में नजरअंदाज हुआ है। जो बुनियादी ढांचे पिछले 67 सालों से हैं, उसकी सजा खिलाड़ी भुगत रहे हैं। डॉ. निर्मल सिंह ने आश्वासन दिया कि सरकार केंद्र के साथ फंड को लेकर मुद्दा उठाएगी।
उन्होंने कहा कि हम एक व्यापक नीति का गठन करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हमें कुछ और समय दिया जाए, एक साल के भीतर सब कुछ करना संभव नहीं है। जब उपमुख्यमंत्री आश्वासन दे रहे थे, उसी समय पवन गुप्ता बीच में बोल पड़े ‘झूठे भाषण से काम नहीं चलेगा’।