जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर गतिरोध जारी है। इस बीच भाजपा नेता जुगल किशोर शर्मा एक बार फिर से राज्यपाल एनएन वोहरा से मिले हैं।
हालंकि राज्यपाल ने उनसे पार्टी का प्लान मांगा था लेकिन सरकार बनाने को लेकर पार्टी ने राज्यपाल से अतिरिक्त समय की मांग की है।
जुगल किशोर शर्मा ने राज्यपाल से मिलने के बाद पत्रकारों से कहा, राज्यपाल से राज्य में एक स्थाई सरकार के बारे में चर्चा की गई। जैसे ही पार्टी सरकार बनाने को लेकर किसी फैसले पर पहुंचेगी इसकी सूचना राज्यपाल को दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि, राज्य की जनता ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए जनादेश दिया है और सरकार बनाने के लिए सभी पार्टियों से बातचीत का दौरा जारी है।
महबूबा भी मिली थीं राज्यपाल से
इससे पहले बुधवार को पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती आज राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात की। यह मुलाकात जम्मू के राजभवन में हुई। बताया जा रहा है कि एक घंटे की मुलाकात के दौरान सरकार गठन के मुद्दे पर महबूबा ने राज्यपाल से चर्चा की। महागठबंधन सरकार की अटकलों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पीडीपी पर तंज कसते हुए कहा है कि अगर उनके पास 55 विधायकों का बहुमत है तो फिर वो बना लें सरकार।
जम्मू कश्मीर में सरकार गठन पर महबूबा मुफ्ती ने अभी भी कोई ठोस बयान नहीं दिया है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वो जल्दबाजी में सरकार बनाना नहीं चाहती हैं। महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'यह बैठक अनौपचारिक थी. जम्मू कश्मीर में इस बार बिखरा हुआ जनादेश आया है।
महबूबा ने कहा कि जहां कश्मीर में पीडीपी को बहुमत मिला, वहीं जम्मू में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें आई हैं। पीडीपी सिर्फ सरकार बनाने के पीछे नहीं भाग रही है। हम जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेने वाले। मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक कहा जा रहा है कि पीडीपी के पास 55 से ज्यादा विधायकों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन हम सरकार बनाने की जल्दी में नहीं है।'
'महागठबंधन भी विकल्प हो सकता है'
मंगलवार को पीडीपी की मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर ने यहां एक बयान में कहा था कि पार्टी के हर स्तर के कार्यकर्ताओं से लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने के सारे विकल्प खुले हैं। महागठबंधन भी विकल्प हो सकता है।
पीडीपी के प्रवक्ता ने बताया कि हम पार्टी किसी समाधान तक नहीं पहुंच सकी हैं। यह बड़ी मुश्किल स्थिति है और हम इसे राज्य की बेहतरी, इसके आर्थिक विकास एवं इससे जुड़ी राजनीतिक अनिश्चितता खत्म करने के लिए पीडीपी अपनी ओर से सभी कोशिशें कर रही है।
गौरतलब है कि राज्य विधानसभा के नतीजों के चलते प्रदेश में त्रिशंकु सदन के हालात बने हैं, जहां पीडीपी 87 सदस्यीय सदन में 28 सीटों के साथ सर्वाधिक बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर है। नेशनल कांफ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती हैं।