जम्मू। गरमी और उमस के बीच बिजली के संकट ने फिर से जीना दुश्वार कर दिया। सोमवार को दिन के समय ही कई इलाकों में दस घंटों तक बिजली गुल रहने से शहर बिलबिला उठा। सुबह पांच से दस बजे की कटौती शेड्यूल से की गई लेकिन इसके बाद भी बिजली के आने।जाने के सिलसिले ने शहरवासियों को बेहाल कर दिया। शहर के पलौड़ा, जवाहर नगर, न्यू प्लाट, तालाब तिल्लो, नरवाल समेत अन्य जगहों में ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। हालांकि बाद में विभाग ने ट्रांसफार्मर बदलकर इन इलाकों में बिजली बहाल कर दी थी। दोपहर बाद बिजली की डिमांड 1130 मेगावाट जबकि देर शाम 1180 मेगावाट रही है। यह हालात बढ़ती गर्मी में बिजली तंत्र के कमजोर ढांचे और आपूर्ति के मुकाबले बढ़ती मांग से उपज रहे हैं।
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अप्रैल से अभी तक 700 से ज्यादा ट्रांसफार्मर जल चुके
अप्रैल से लेकर अभी तक करीबन 700 से ज्यादा ट्रांसफार्मर जल चुके हैं। जला ट्रांसफार्मर ठीक नहीं होता, इसे बदलना पड़ता है। खराब ट्रांसफार्मर को ठीक करने में करीब 15 दिन लगते हैं। इन्हें ठीक करके रख लिया जाता है। इसीलिए ट्रांसफार्मर जलने पर इन्हें बदलकर कुछ घंटे में समस्या का समाधान कर दिया जाता है।
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लंबे समय से तार
बदले न ट्रांसफार्मर
- कम क्षमता के ट्रांसफार्मर लोड बढ़ने से जल रहे, ढीले तार जरा सी हवा में कर रहे शॉर्ट सर्किट
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अप्रैल से लग रहे बिजली कट आगे भी ऐसे ही जारी रहने के आसार हैं। सबसे बड़ा कारण, बिजली ढांचे का कमजोर होना है। काफी समय से न तो तारें बदली गई हैं और न ही ट्रांसफार्मर अपडेट किए गए हैं। अभी जो ट्रांसफार्मर लगे हैं वह 1100 मैगावाट क्षमता के हैं। गर्मी में बिजली डिमांड 1240 मैगावाट तक पहुंचने से ये लोड सहन नहीं कर पाते और जल जाते हैं। तारें भी लूज हैं जो जरा सी हवा चलने पर शार्ट सर्किट होकर जल जाती हैं। हालांकि बिजली विभाग ढांचा अपडेट करने की तैयारी में है। शहर में 900 ट्रांसफार्मर लगने हैं जिनमें से 70-80 लग चुके हैं। इसके लिए 200 करोड़ से ज्यादा का फंड भी रखा गया है लेकिन अभी इसमें समय लगेगा। अब मौसम बदलने पर बिजली डिमांड में कमी से ही राहत की उम्मीद दिख रही है। इधर बिजली कटों से इंडस्ट्री भी परेशान है लेकिन उन्होंने अपने जेनरेटर लगा रखे हैं जिससे उन्हें ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
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तार की गुणवत्ता पर सवाल
बार बार खराबी होने से शहर में बिछे तारों के जाल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ये तार थोड़े समय बाद लूज हो जाते हैं। हालांकि बिजली विभाग बीच-बीच में तार की मरम्मत करता है लेकिन ये अस्थाई तौर पर ही होती है, जबकि स्थायी समान नए तार लगाना है।
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पानी सप्लाई भी हो रही प्रभावित
बिजली कटों से कभी कभार पानी सप्लाई भी प्रभावित होती है। शहर में इस समय रोजाना 54 जीएमडी पानी की जरूरत है। अगर 5 घंटे का लंबा कट लगे तो अगले दिन के लिए पानी कम पड़ जाता है। पीएचई के पास अपने ट्रांसफार्मर हैं, जिससे कम समय के कट में सप्लाई निर्बाध जारी रहती है।
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ढांचा दुरुस्त करने में समय लगेगा
बिजली ढांचा कमजोर है। गर्मी के साथ बिजली की डिमांड बढ़ने से ये ओवरलोड हो जाता है, जिससे कट लगने की समस्या आ रही है लेकिन ढांचे को दुरुस्त करने के लिए विभाग ने 200 करोड़ का बजट बनाया है। फंड भी उपलब्ध है। इसके तहत शहर में ज्यादा क्षमता वाले 900 ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं। कुछ इलाकों में 70-80 ट्रांसफार्मर नए लगा भी दिए गए हैं। तार बदले जाने हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा।
पीडी सिंह, एक्सईएन पीडीडी