कश्मीर में फिर से हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही है। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों कोे आवास प्रमाण पत्र दिए जाने के विरोध में अलगाववादियों ने निर्णायक लड़ाई का एलान किया है। कश्मीर को संप्रभुता हासिल नहीं होने के मुद्दे को भी अलगाववादी आरएसएस एजेंडे से जोड़कर प्रचारित कर रहे हैं।
श्रीनगर समेत पूरी कश्मीर घाटी मस्जिदों से विरोध प्रदर्शन की अपीलें शुरू हो गईं हैं। मस्जिदों से आजादी के तराने एक बार फिर से गूंजने लगे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है।सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उपद्रव और हिंसा के लिए फंडिंग के इनपुट मिले हैं।
नोटबंदी के बाद से कैश किल्लत में उपद्रवियों की फंडिंग बंद हो गई थी। लेकिन, अब आतंकियों और अलगाववादियों के पास नकदी की खेप पहुंच चुकी है। अब वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को प्रमाण पत्र दिए जाने पर अलगाववादियों को नया मुद्दा मिल गया है। नेशनल कांफ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने पहले हुर्रियत की हड़ताल का समर्थन किया था और अब वेस्ट पाकिस्तानी के मुद्दे को कश्मीर की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) से छेड़छाड़ बताते हुए विरोध किया है।
यासिन मलिक समेत अलगाववादी नेताओं ने दी चेतावनी
यासीन मलिक
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अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक ने इस मुद्दे पर जीवन-मृत्यु का संघर्ष छेड़ने की चेतावनी दी है। वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी 70 साल से जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं, लेकिन, उन्हें नागरिकता नहीं मिली है। आवासीय और जातीय प्रमाण पत्र के अभाव में उन्हें केंद्र की भी नौकरियां नहीं मिल पातीं।
प्रधानमंत्री कार्यलय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की पहल पर केंद्रीय गृह मंत्रालय अब केंद्र रिफ्यूजियों की भर्ती के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। देश के दूसरे हिस्सों में बसे वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को भारतीय नागरिक की तरह सुविधाएं हासिल हैं। इनमें से डॉ. मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री भी बन चुके हैं।
भाजपा और पीडीपी सरकार के गठबंधन एजेंडे में वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों का मसला हल करना शुमार है। लिहाजा, रियासत सरकार केंद्र की नौकरियों के लिए उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र जारी कर रहा है।
रिफ्यूजियों को केंद्रीय बलों में मिलेंगी नौकरियां : डॉ. जितेंद्र
पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
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प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नेकां का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग बांग्लादेशी नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में बसाते रहे वे 70 साल से रह रहे वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में इंडियन रिजर्व बटालियन की पांच कंपनियां मंजूर हुईं हैं। उनमें वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को प्राथमिकता दी जाएगी।