The Royal Family of Bhutan visits the Textile Museum in Leh. Source - social media
लेह। सोमवार को लेह हवाई अड्डे पर इतिहास बनते देखा गया, जब भूटान की महारानी माता अशि त्सेरिंग पेम वांगचुक और राजकुमारी अशि केसांग छोदेन वांगचुक लद्दाख पहुंचीं।
यह पहला अवसर है जब भूटान के शाही परिवार ने आधिकारिक तौर पर लद्दाख की धरती पर कदम रखा है। इस दौरे को न केवल राजनयिक यात्रा, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक साझेदारी और साझी हिमालयी विरासत का प्रतीक माना जा रहा है। लद्दाख व भूटान के रिश्ते 17वीं शताब्दी से हैं। इतिहासकार बताते हैं कि लद्दाख के राजा सिंगे नामग्याल (1616–1642) के शासन में दोनों देशों में बौद्ध धर्म के विस्तार के साथ सामरिक सहयोग भी बढ़ा। भूटानी बौद्ध भिक्षु व लद्दाखी विद्वान सदियों तक हिमालय पार कर धार्मिक ग्रंथ, परंपराएँ और ज्ञान साझा करते रहे। दोनों देशों में ऊन, नमक, चाय और शिल्पकला के आदान-प्रदान से व्यापारिक रिश्ते भी मजबूत हुए। भूटान के शाही परिवार की यह यात्रा केवल औपचारिक शिष्टाचार भर नहीं बल्कि दोनों क्षेत्रों (लद्दाख-भूटान) की साझी आध्यात्मिक और हिमालयी संस्कृति को फिर जीवंत करने वाले अवसर के रूप में देखी जा रही है।