बच्चों से भीख मंगवाने का धंधा शहर में खूब फलफूल रहा है। भीख मांगने वाले इन बच्चों में अधिकतर बाहरी राज्यों के हैं, जिन्हें न तो अपने मां-बाप के नाम का पता है और न ही गांव-कसबे का। यहां तक कि इनसे मजदूरी भी कराई जा रही है। इन बच्चों को दूर के राज्यों से चुराकर लाए जाने की बात कही जा रही है।
शहर के किसी चौक-चौराहे, बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर नजर दौड़ाएं तो बड़ी संख्या में चार से दस साल तक के इन बच्चों को भीख मांगते आसानी से देखा जा सकता है। चार साल से कम उम्र के बच्चों को गोद में लिए कई महिलाएं भी भीख मांगती देखी जा सकती हैं।
अचंभे की बात तो यह भी है कि ट्रैफिक कर्मचारियों और पुलिस की नाक के नीचे भीख मंगवाने का धंधा जोरों पर चल रहा है। पुलिस या यातायात कर्मी भीख मांगते किसी बच्चे से उसकी पहचान या अन्य पूछताछ करने की कोशिश भी नहीं करते। इनके सरगना कौन हैं इन पर पुलिस नहीं पहुंच पा रही है।