राज्य में राज्यपाल शासन लगने पर सैकड़ों आतंकवाद से प्रभावित जम्मू के विस्थापित परिवार मायूस हो गए हैं। सभी नई सरकार से उम्मीद लगाए बैठे थे कि सरकार उनकी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाएगी और उनके पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार कोई पैकेज देगी।
लेकिन अब राज्यपाल शासन लगने पर उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। विस्थापितों का कहना है कि सभी ने कुछ वर्ष पहले राज्यपाल के सामने अपनी मांगों को रखा था, लेकिन कुछ नहीं बन सका है।
1995 में डोडा, रामबन, गूल, बनिहाल, माहौर, अरनास में आतंकवाद से प्रभावित होकर अपने घरों को छोड़कर सैकड़ों परिवार जम्मू और उधमपुर पहुंचे थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन परिवारों की संख्या 1024 है, जबकि वर्तमान समय में इनकी संख्या दो हजार के करीब है।
सभी विस्थापित परिवार कश्मीरी विस्थापितों की तर्ज पर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन इनकी मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं। जम्मू के विस्थापित परिवारों को सरकार की तरफ से प्रत्येक परिवार 1600 रुपये नकद राशि और राशन दिया जा रहा है, जबकि आज तक इनको आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है।
ज्यादातर परिवार किराए पर कमरे लेकर गुजारा कर रहे हैं। वर्षों से जम्मू के विस्थापित कश्मीरी विस्थापितों की तर्ज पर आवास की सुविधा मांग रहे हैं, लेकिन यह भी पूरी नहीं हो सकी है।
डिस्ट्रिक्ट माइग्रेंट सेल के प्रधान शेर सिंह का कहना है कि नई राज्य सरकार से सभी बहुत उम्मीद लगाकर बैठे थे, लेकिन राज्यपाल शासन लगने पर उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।