पूर्व रणजी खिलाड़ी गोपाल शर्मा के लिए क्रिकेट एक जुनून का नाम है। खुद टीम इंडिया का हिस्सा न बन पाने पर अ़फसोस करने के बजाय अब उन्होंने नए लड़कों को क्रिकेट की बारीकियां सिखाना ही अपना मकसद बना लिया है।
वे पिछले 26 सालों से उधमपुर में युवाओं को बिना कोई फीस लिए क्रिकेट की कोचिंग दे रहे हैं। उनके सिखाए कई लड़कों ने रियासत में खासा नाम कमाया है। गोपाल का मानना है कि हमारे बच्चों में हुनर की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में वे वाजिब मुकाम हासिल नहीं कर पाते।
गोपाल ने क्रिकेट को उधमपुर के बच्चों तक पहुुंचाने के लिए पूरा जीवन मानो समर्पित कर दिया है। क्रिकेट को लेकर अपनी सोच और अपने सफर के बारे में गोपाल शर्मा ने बताया कि क्रिकेट हमेशा से ही उनके लिए जुनून की तरह रहा है।
पेशे से शिक्षक रहे गोपाल शर्मा ने वर्ष 1975 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन के चलते वे सन 1979 में राणजी टीम का हिस्सा बने। उधमपुर में क्रिकेट के स्तर को बढ़ाने और युवाओं को खेल के तकनीकी पहलू समझाने के उद्देश्य से 1990 में उन्होंने इलाके के बच्चों को कोचिंग देना शुरू की जो आज भी जारी है।
उन्होंने खिलाडि़यों को निशुल्क क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। उनके सिखाए कई खिलाड़ी रियासत में खूब नाम कमा रहे हैं। सरकारी स्तर पर इच्छा शक्ति की कमी और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव के चलते इन बच्चों को प्रोत्साहन नहीं मिल पाया। गोपाल शर्मा का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी को आगे ले जाने के लिए उसकी लगन के साथ सुविधाओं का होना जरूरी है।
जिले के बच्चों को कभी भी ऐसे मैदान या खेल सुविधाएं ही नहीं दी गई कि वह आगे बढ़ सकें। नतीजतन आज तक उधमपुर का कोई भी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाया। फिलहाल गोपाल शर्मा बीमार होने के कारण मैदान से दूर हैं। उनका कहना है कि भले ही वह मैदान से दूर हैं, पर उनका एकमात्र सपना है कि जिले का कोई खिलाड़ी भारतीय की टीम का हिस्सा बने।