त्रासदी के तीन महीने के बाद प्रशासन ने 45 परिवारों को उधमपुर के सुई इलाके में आपता प्रबंधन की इमारत में पहुंचा दिया और सरकारी राहत मिलने तक इनको यही पर रहने को कहा गया। छह वर्ष से यह 45 परिवार परेशानियों से जूझते हुए इसी इमारत में रहे हैं। इमारत एक बड़ा हाल है और इसमें प्लाई के साथ बंटवारा किया गया है। हाल में हमेशा शोर रहता है और शोर में ही यह परिवार जीवन जीने को मजबूर हैं। सुई में रह रहे कुंज लाल, बंसी लाल, सोम राज, इशर दास ने बताया कि सरकार की तरफ से आत तक उनको प्रति व्यक्ति के हिसाब से दो किलो चावल और तीन किलो गेहूं दिया जा रहा है। इसके अलावा सभी दिहाड़ी लगाकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
पंजर व कसूरी में रह रहे 87 विस्थापित परिवार
त्रासदी के बाद 87 परिवारों ने शहर की तरफ जाने से इंकार दिया। इन्होंने अपनी बची हुई जमीन पर ही ढांचा तैयार किया। कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के सहयोग से बस गए। लेकिन इनके लिए भी जीवन इतना आसान नहीं है। जीवन भर की पूंजी तो मलबे में दब चुकी थी, लेकिन इन परिवारों ने नए सिरे से जीवन शुरू किया। पंजर के सरपंच कौशल कुमार ने बताया कि आज भी यह विस्थापित परिवार पुनर्वास के लिए सरकारी राहत का इंतजार रहे हैं। सरकार ने लीज पर जमीन देने का एलान तो किया है, लेकिन पुनर्वास को लेकर स्थिति को स्पष्ट नहीं किया है।
मानसर और डबरेह में लीज की जमीन पर बसाए जाएंगे 132 परिवार
सरकार के आदेश के अनुसार 71 विस्थापित परिवारों का मानसर में पुनर्वास किया जाएगा, जबकि 61 परिवारों का डबरेह में पुनर्वास किया जाएगा। इनको सरकारी जमीन लीज पर दी जाएगी और ढांचा भी तैयार करके दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार की तरफ से किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई है। प्रत्येक परिवार को पांच मरले जमीन लीज पर दी जाएगी। पंजर के पूर्व सरपंच व त्रासदी का शिकार रमेश सिंह ने कहा कि सरकार की तरफ से किए गए एलान के बारे में अभी तक विस्थापित परिवारों को पूरी जानकारी नहीं है। किस तरह से इन परिवारोञं ा ापुनर्वास होगा कुछ भी नहीं पता है।