नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कारगिल के रहने वाले आखून असगर अली बशारत को साहित्य एवं शिक्षा जबकि सेरिंग नामग्याल को लकड़ी की शिल्पकारी के लिए पद्म पुरस्कार दिया गया।
लद्दाख की दो शख्सियतों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया। सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कारगिल के रहने वाले आखून असगर अली बशारत को साहित्य एवं शिक्षा जबकि सेरिंग नामग्याल को लकड़ी की शिल्पकारी के लिए पद्म पुरस्कार दिया गया।
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आखून असगर अली बशारत का सबसे मुख्य योगदान बलती भाषा और संस्कृति को पुनर्जीवित व लोकप्रिय करना है। बलती भाषा मुख्य रूप से लद्दाख के कारगिल जिले और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित व बलतीस्तान में बोली जाती है।
बशारत को बलती कवि और बलती विशेषज्ञ माना जाता है। वहीं, लेह के सेरिंग नामग्याल पिछले चालीस वर्ष से लकड़ी की शिल्पकला से जुड़े हैं। लद्दाख में यह शिल्पकला कई पीढ़ियों से चली आ रही है।