सर्दियों के आते सीमा पर लांचिंग पैड पर बैठे आतंकी घुसपैठ की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। पिछले तीन साल के आतंकी हमलों का रिकार्ड देखा जाए तो सर्दियों में खराब मौसम की आड़ में ही आतंकियों ने बड़े हमले किए हैं।
इसमें बैट और फिदायीन हमले शामिल हैं। सर्दियों में धुंध पड़ने के साथ ही आतंकी घुसपैठ करने की कोशिश में जुट गए हैं। खासकर सर्दियों में आतंकी जम्मू को निशाना बनाने की फिराक में रहते हैं।
पिछले तीन साल में ऐसा हुआ भी है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने भी कमर कस ली है। खराब मौसम की आड़ में हमला करने की शुरुआत 2012 में पुंछ सेक्टर से हुई थी। इसके बाद लगातार आतंकियों ने इसका लाभ उठाया है।
2012 में जनवरी माह के दौरान पाकिस्तान की बैट टीम ने पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर से भारतीय सीमा में घुसकर दो भारतीय जवानों के सिर काट लिए। तब बैट टीम ने धुध का लाभ उठाकर ऐसा किया।
घुसपैठ कर सकते हैं आतंकी
वर्ष 2014 में आतंकियों ने कठुआ के हीरानगर सेक्टर में घुसपैठ की। तब भी आईबी पर धुंध का लाभ उठाकर घुसपैठ की और आतंकी हमला किया। वर्ष 2015 में आरएस पुरा के अरनिया सेक्टर में हुआ आतंकी हमला भी धुंध की आड़ में हुआ।
ऐसे में अब फिर से धुंध का सीजन शुरू हो गया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि सांबा, आरएस पुरा, कठुआ, पुंछ, पलांवाला, कानाचक, सुंदरबनी, नौशेरा आदि ऐसे सेक्टर हैं, जहां आतंकी सीमा से सट कर बैठे हुए हैं और घुसपैठ की फिराक में हैं।
जो धुंध में खराब मौसम का लाभ उठाकर हमला करने की साजिश रच रहे हैं। सेना पहले ही पुष्टि कर चुकी है कि 300 आतंकी एलओसी और आईबी पर घुसपैठ के लिए डेरा डाले हुए हैं। ऐसे में धुंध में और भी चुनौती बढ़ जाएगी।
इससे निपटने के लिए सेना और बीएसएफ ने सुरक्षा इंतजाम कर दिए हैं, लेकिन खराब मौसम में घुसपैठ का सामने करने की चुनौती बनी है।