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आवाम की आवाज: उपराज्यपाल बोले- सात दशक बाद पीएम मोदी ने की जम्मू-कश्मीर में सामाजिक न्याय की स्थापना

Sun, 18 Feb 2024 02:47 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

एलजी ने आत्मनिर्भर जम्मू कश्मीर के निर्माण के लिए सामाजिक न्याय प्रदान करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लाभार्थियों और प्रेरक गुमनाम नायकों की कहानियां भी साझा कीं जो नया जम्मू कश्मीर में परिवर्तन का प्रतीक बन गए हैं।
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LG Manoj Sinha - फोटो : डीआईपीआर
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विस्तार
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा देश की आजादी के सात दशकों से अधिक समय के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में सामाजिक न्याय की स्थापना की। इससे सभी को समान अवसर और समाज में हाशिए पर रहने वाले वर्गों की संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित की गई है। अवाम की आवाज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने यह बातें कहीं।

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इस दौरान एलजी ने आत्मनिर्भर जम्मू कश्मीर के निर्माण के लिए सामाजिक न्याय प्रदान करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने लाभार्थियों और प्रेरक गुमनाम नायकों की कहानियां भी साझा कीं जो नया जम्मू कश्मीर में परिवर्तन का प्रतीक बन गए हैं।

उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के दृष्टिकोण ने विकासात्मक असंतुलन को दूर कर दिया है और जम्मू-कश्मीर को त्वरित और समावेशी विकास के पथ पर ला दिया है।
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उन्होंने कहा, कोई भी भविष्योन्मुख समाज जन-केंद्रित शासन के बिना प्रगति नहीं कर सकता है। हमारा दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि विकास समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे और अवसरों तक समान पहुंच के उपायों को और मजबूत किया जाए।
 
उन्होंने कहा कि गुज्जर, बकरवाल और अन्य सूचीबद्ध जनजातियों के हितों की रक्षा करते हुए पहाड़ी, पाडरी, कोली और गद्दा ब्राह्मण को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय सभी के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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अवाम की आवाज कार्यक्रम के 35वें संस्करण को जम्मू कश्मीर के गुमनाम नायकों और नारी शक्ति को समर्पित करते हुए, उपराज्यपाल ने समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान और आदिवासी संस्कृति के पुनरुद्धार के लिए असाधारण प्रयासों के लिए बांदीपोरा की शबनम बशीर की सराहना की।

उन्होंने बडगाम की वहीदा अख्तर का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने भारी चुनौतियों का सामना करते हुए क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उनके आर्थिक सशक्तिकरण में मदद की।

जम्मू की रेवा रैना विभिन्न स्कूलों में खेल के माध्यम से मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रही हैं। उपराज्यपाल ने कहा, उनकी दूरदर्शिता और निस्वार्थता ने युवाओं को प्रगतिशील सोच लाने और उन्हें आकार देने में मदद की है।

उपराज्यपाल ने सरस भारती, मेधावी शर्मा, उधमपुर की अनीता शर्मा और शाहनाज बानो, कठुआ की सुनीता देवी, बारामुला के नाजिश राशिद, गांदरबल की महबूबा अख्तर और सांबा की निवासी लक्ष्मी के नामों का उल्लेख किया। जिन्होंने उद्यमिता, डोगरी लोक को बढ़ावा देने, बसोहली चित्रकला में अपना योगदान दे रही हैं।
 
उपराज्यपाल ने महिलाओं के स्वास्थ्य, कल्याण और सुरक्षा पर श्रीनगर से डॉ. सैयद सेलीन, रियासी से प्रिया वर्मा और पुलवामा से इंशा मंजूर से प्राप्त बहुमूल्य सुझावों को साझा किया और उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए।

 उन्होंने महिलाओं के बीच वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं से संबंधित सांबा के रिशु गुप्ता, कुपवाड़ा की नीलोफर बुखारी, उधमपुर की चंचल कुमारी और बडगाम की आरिफा आरा के प्रेरक विचारों को भी व्यक्त किया।

इस महीने के एपिसोड में उपराज्यपाल ने राष्ट्रवादी विचारक-लेखक ठाकुर रघुनाथ सिंह को श्रद्धांजलि दी और डोगरी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।

 उन्होंने जम्मू कश्मीर की समृद्ध कला और विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए पद्म श्री प्राप्तकर्ता डोगरी लोक गायक रोमालो राम और श्रीनगर के मास्टर शिल्पकार गुलाम नबी डार को भी बधाई दी और उनकी सराहना की।
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