अवाम की आवाज कार्यक्रम के 35वें संस्करण को जम्मू कश्मीर के गुमनाम नायकों और नारी शक्ति को समर्पित करते हुए, उपराज्यपाल ने समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान और आदिवासी संस्कृति के पुनरुद्धार के लिए असाधारण प्रयासों के लिए बांदीपोरा की शबनम बशीर की सराहना की।
उन्होंने बडगाम की वहीदा अख्तर का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने भारी चुनौतियों का सामना करते हुए क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उनके आर्थिक सशक्तिकरण में मदद की।
जम्मू की रेवा रैना विभिन्न स्कूलों में खेल के माध्यम से मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रही हैं। उपराज्यपाल ने कहा, उनकी दूरदर्शिता और निस्वार्थता ने युवाओं को प्रगतिशील सोच लाने और उन्हें आकार देने में मदद की है।
उपराज्यपाल ने सरस भारती, मेधावी शर्मा, उधमपुर की अनीता शर्मा और शाहनाज बानो, कठुआ की सुनीता देवी, बारामुला के नाजिश राशिद, गांदरबल की महबूबा अख्तर और सांबा की निवासी लक्ष्मी के नामों का उल्लेख किया। जिन्होंने उद्यमिता, डोगरी लोक को बढ़ावा देने, बसोहली चित्रकला में अपना योगदान दे रही हैं।
उपराज्यपाल ने महिलाओं के स्वास्थ्य, कल्याण और सुरक्षा पर श्रीनगर से डॉ. सैयद सेलीन, रियासी से प्रिया वर्मा और पुलवामा से इंशा मंजूर से प्राप्त बहुमूल्य सुझावों को साझा किया और उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
उन्होंने महिलाओं के बीच वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं से संबंधित सांबा के रिशु गुप्ता, कुपवाड़ा की नीलोफर बुखारी, उधमपुर की चंचल कुमारी और बडगाम की आरिफा आरा के प्रेरक विचारों को भी व्यक्त किया।
इस महीने के एपिसोड में उपराज्यपाल ने राष्ट्रवादी विचारक-लेखक ठाकुर रघुनाथ सिंह को श्रद्धांजलि दी और डोगरी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।
उन्होंने जम्मू कश्मीर की समृद्ध कला और विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए पद्म श्री प्राप्तकर्ता डोगरी लोक गायक रोमालो राम और श्रीनगर के मास्टर शिल्पकार गुलाम नबी डार को भी बधाई दी और उनकी सराहना की।