वर्ष 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जब बसोहली स्थित रावी नदी पर पुल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी तो इस परियोजना के पीछे एक दूरदर्शी सोच भी है।
देश के तत्कालीन सुरक्षा सलाहकारों ने प्रधानमंत्री को सलाह दी थी कि कश्मीर में पहुंचने का लखनपुर ही एकमात्र रास्ता है। सुरक्षा सलाहकारों की सलाह पर वाजपेयी ने तत्काल इसके निर्माण पर सहमति जता दी।
उनका मानना था कि सामरिक कारणों की वजह से कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से जुड़ने का यह पुल वैकल्पिक राह बनेगा।
यही कारण है कि केंद्र सरकार ने 1998 में ही पठानकोट, धार, दुनेरा, बसोहली, बनी, भद्रवाह, डोडा, अनंतनाग को इससे जोड़ने का फैसला लिया।
इरकान और एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस पुल को तैयार किया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने वीरवार को रियासत के स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह को आड़े हाथो ले लिया।
लाल सिंह ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बार्डर रोड आर्गनाइजेशन के काम की क्वालिटी पर ध्यान देने की जरूरत है।
लाल सिंह ने कहा कि वह खुद भी ए-1 ठेकेदार रहे हैं और उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि कहां क्या-क्या गुंजाइश रहती है। इसलिए बीआरओ को निर्देश दिए जाएं।
अब भला परिकर कहां चूकने वाले थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मंत्री साहब अच्छे ए-1 ठेकेदार रहे हैं। उन्हें पता है कहां क्या हो सकता है।
लेकिन बीआरओ में ऐसा कुछ नहीं है। यहां सब काम क्वालिटी का ही होता है। समारोह को संबोधित करते हुए डा. जितेंद्र सिंह ने बसोहली को हैरिटेज शहर बनाने का मुद्दा उठाया।
उनका कहना है कि इससे यहां की कला संस्कृति सुरक्षित रखने के अलावा आर्थिक रूप से भी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
तय समय से एक माह पहले बसोहली पुल की परियोजना को पूरा करने पर सैन्य प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग ने बीआरओ की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सेना सीमा पर सुरक्षा के साथ विकास कार्यों में भाग लेकर लोगों को सुविधाएं प्रदान करने की हरसंभव कोशिश करेगी।