जम्मू-कश्मीर विधानसभा के छह साल के कार्यकाल के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सरकार को अदालत ने अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। जेएनएफ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार याचिकाकर्ता बलराज बख्शी ने विधानसभा के पांच साल के स्थान पर छह साल के कार्यकाल को चुनौती दी है।
साथ ही रियासत के संविधान की धारा 2 के खंड 1 को हटाने की मांग की है, जिसे 17 फरवरी 1997 को संविधान के 16वें संशोधन के तहत जोड़ा गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार यह रियासती संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता के वकील एसएस लहर और मेहरबान सिंह के अलावा एएजी एचए सिद्दिकी की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस जनक राज कोतवाल ने सरकार को इस संबंध में अपना पक्ष रखने का एक और अवसर प्रदान किया। अदालत ने कहा कि याचिका में पूछे गए सवाल पर यदि सरकार जवाब देने में असफल रहती है तो मामले की अगली सुनवाई में रियासत के मुख्य सचिव खुद पेश हों।