जम्मू की निर्भरता दूसरे राज्यों पर पहले भी दिख चुका है यही ट्रेंड
अर्थशास्त्री फालेन्द्र सूदन कहते हैं कि जम्मू में ज्यादातर जरूरी सामान बाहरी राज्यों से आता है और सप्लाई पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ते ही इसका असर यहां जल्दी और ज्यादा दिखाई देता है। पिछले वर्षों में भी देखा गया है कि ईंधन महंगा होने के कुछ दिनों के भीतर ही जम्मू में सब्जी और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ने लगते हैं। इस बार भी वैसा ही रुझान देखने को मिल सकता है।
पड़ोसी राज्यों से कम है प्रदेश की महंगाई दर
ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में जम्मू-कश्मीर में महंगाई दर करीब 1.86 फीसदी रही है, जो कई पड़ोसी राज्यों के मुकाबले कम है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में महंगाई दर इससे अधिक दर्ज की गई है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में महंगाई का स्तर अपेक्षाकृत नियंत्रित है लेकिन यहां बाहरी राज्यों पर निर्भरता ज्यादा होने के कारण असर थोड़ी देर से दिखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ढुलाई लागत का दबाव बढ़ेगा, वैसे-वैसे पड़ोसी राज्यों की तरह जम्मू में भी महंगाई का असर तेजी से दिखाई दे सकता है।