उन्होंने कहा कि यह भड़काऊ बयान था और ऐसा नहीं करना चाहिए था। कई और कश्मीरी नेता भी अनुच्छेद 370 व 35ए पर गलत तस्वीर पेश करते रहे। भारतीय सांसदों के शिष्टमंडल से मिलने से कई नेताओं ने इनकार कर दिया था।
इन सबका नुकसान जम्मू कश्मीर के लोगों को हुआ है। केंद्र सरकार खासतौर से मोदी और शाह को धमकाने से नहीं उनसे आग्रह करने से बात सुलझेगी। पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पांच महीनों से नजरबंद और जेलों में कैद किए गए नेताओं को एक बार में रिहा करने की मांग की है।
कहा कि सरकार नजरबंद नेताओं के मामले में एक या दो नेताओं को कुछ अंतराल के बाद रिहा करने की नीति पर चल रही है। वह भी नजरबंद हुए थे और रिहा किए गए हैं। उन्होंने कहा देश के संविधान व राष्ट्र के लिए समर्पण भाव से काम करने वाले मुख्यधारा के सभी नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए।
तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद हैं। इनमें डॉ. फारूक अब्दुल्ला ऐसे नेता हैं जो भारत माता की जय खुलकर कहते रहे हैं। अगर सरकार को लगता है कि किसी नेता ने देश के विरुद्ध जाकर काम किया हैं तो उस पर अलग से मुकदमा चलाया जा सकता है।
बेग ने कहा जम्मू कश्मीर के राज्य से केंद्र शासित प्रदेश बनने से यहां रहने वाले हर किसी नागरिक को नुकसान हुआ है। केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल के हाथ में सत्ता रहती है। विधानसभा चुनाव हो और मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल भी बन जाए तो भी उपराज्यपाल की ही मर्जी चलती है।
बेग ने हाल ही में उपराज्यपाल से मुलाकात करने वाले कश्मीरी सियासी नेताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें यह पता नहीं है कि उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेश को न तो राज्य का दर्जा दे सकते हैं और न ही डोमिसाइल हक पर कोई फैसला ले सकते है। यह क्षेत्राधिकार केवल केंद्र सरकार व संसद का है। उन्होंने प्रदेश में थर्ड फ्रंट की संभावना से भी इनकार किया।
प्रदेश के नागरिकों को रोजगार, भूमि पर डोमिसाइल हक मिले
बेग ने कहा कि जम्मू कश्मीर प्रदेश के नागरिकों को हिमाचल प्रदेश, असम व अन्य उत्तर पूर्व के प्रदेशों की तरह रोजगार व भूमि पर डोमिसाइल हक मिलना चाहिए। महाराजा के समय में भी ऐसा ही था। उन्होंने आशा प्रकट की कि इस संबंध में केंद्र सरकार जल्द ही उचित कदम उठाएगी।