तीन सितंबर के बाद टोल फ्री नंबर पर दर्ज कराईं शिकायतें रद्द किए जाने से किसानों में रोष
कृषि विभाग के कार्यालय में जा पहुंचे अरनिया क्षेत्र के किसान, घेराव की कोशिश भी की
अरनिया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान की फसल के नुकसान का मुआवजा पाने के लिए टोल फ्री नंबर पर की गई शिकायतों को रद्द किए जाने से किसानों में रोष है। सोमवार को उन्होंने कृषि विभाग के दफ्तर में जाकर घेराव की कोशिश की। बीमा कंपनी ने तीन सितंबर के बाद की गईं शिकायतों को सुनने से मना कर दिया है, जबकि किसानों के बैंक खातों से फसल बीमा की किस्त कट रही है।
किसानों की नाराजगी देख अरनिया क्षेत्र के कृषि अधिकारी अनिल कुमार ने फसल बीमा योजना कंपनी बजाज आलियांज के अधिकारी के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत हुई है। इसके बाद किसानों की समस्या का तत्काल समाधान करने का आश्वासन दिया है।
क्षेत्र में 24 अगस्त से तीन सितंबर तक के समय को बाढ़ आपदा घोषित किया है। बीमा कंपनी ने तीन सितंबर के बाद ऑनलाइन दर्ज की गई शिकायतों को रद्द कर दिया है। यह तब है जब किसानों के बैंक खातों से फसल बीमा का प्रीमियम किस्त कट रही है। इससे किसानों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ आपदा समय के बाद किसी प्रकार की शिकायत को तरजीह नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग और बीमा कंपनी के बीच तालमेल की कमी साफ तौर पर दिख रही है। बीमा कंपनी के अधिकारी रद्द की गई शिकायतों को स्वीकारने से इन्कार कर रहे हैं।
कोट
पिछले दिनों की भारी बारिश और आंधी से धान की फसल बर्बाद हो गई थी। इसके बाद बीमा कंपनी को फसल के नुकसान की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई गई। मगर शिकायतों को रद्द कर दिया है। उनका तर्क है फसल बीमा योजना का प्रीमियम बैंक खाते से कट जाता है। इसके बावजूद किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला है।
- किसान जनक राज, गांव चानना
बीमा कंपनी खड़ी फसल में जलभराव और आंधी से हुए नुकसान को कवर नहीं कर रही है। क्षेत्र में जोरदार बारिश और आंधी से ही धान की फसल का नुकसान होता है। कंपनी किसानों को सीधे तौर पर लूटने में लगी हुई है।
- किसान विजय कुमार, चानना
बीमा कंपनी मुआवजा देने के समय पर विभिन्न प्रकार के नियम और कानून लागू कर देती है। फसल का प्रीमियम लेते हुए इन नियम और कानून को उजागर नहीं करती है। असहाय और कमजोर किसान ठगा जा रहा है। कृषि विभाग और प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है। किसान को सशक्त और समृद्ध बनाने के दावे जमीन स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं।
- किसान रोशन लाल, चानना
किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल कृषि दफ्तर अरनिया में फसल के नुकसान की ऑनलाइन शिकायत रद्द होने के बाद पहुंचा है। उनकी समस्या की अर्जी लिखित में ली गई है। उच्च अधिकारियों को किसानों की समस्या से अवगत करवा दिया गया है। बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से भी बात हुई है। तत्काल ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
- अनिल कुमार, कृषि अधिकारी अरनिया
खड़ी फसल में जलभराव और आंधी से हुए नुकसान का बीमा कवर नहीं होता। कटी फसल में जलभराव होने से फसल का बीमा कवर होता है। नुकसान की ऑनलाइन शिकायत 72 घंटे के भीतर करनी होती है। जम्मू में बाढ़ आपदा 24 अगस्त से लेकर तीन सितंबर तक हुई। तीन सितंबर के बाद फसल के नुकसान की जितनी भी ऑनलाइन शिकायतें की गई हैं उन्हें रद्द कर दिया गया है। धान की फसल के नुकसान का आकलन नियम और कायदों के अनुसार किया गया है।
- सोनू कश्यप, यूटी प्रमुख बीमा कंपनी बजाज आलियांज
बाढ़ आपदा के दौरान बीमा कंपनी बजाज आलियांज के अधिकारी को फसल के नुकसान की नियम और शर्तों को हटाने के लिए कहा गया था। ऑनलाइन शिकायतें रद्द के मामले पर बजाज आलियांज कंपनी से बात की जाएगी। किसानों की समस्या का तत्काल समाधान किया जाएगा।
- अनिल शर्मा, निदेशक कृषि विभाग