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न केवल सरहद की सुरक्षा, अवाम के लिए भी देवदूत बनकर खड़ी है सेना

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सेना न केवल सरहद की सुरक्षा कर रही है और आतंकियों से लोहा ले रही है, बल्कि अवाम के लिए भी देवदूत बनकर खड़ी है। चाहे बर्फबारी में फंसे मजबूर लोग हों या बीमार, हर वक्त सेना मदद में कदम बढ़ा रही है। या फिर कोरोना से लड़ाई हो जवान मुस्तैदी के साथ अपने कर्तव्यों का निवर्हन कर रहे हैं। आर्मी गुडविल स्कूल के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में भी योगदान दे रही है।
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विषम भौगोलिक परिस्थितियों तथा पाकिस्तान की ओर से लगातार अशांति फैलाने की कोशिशों के बीच सेना अवाम में शांति तथा सौहार्द कायम कर रही है। घाटी में अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदल रहे माहौल में भी सेना का योगदान है क्योंकि वह लोगों में विश्वास बहाली की विभिन्न तरीके से कोशिश कर रही है। भटके युवाओं को सही राह दिखा रही है। आठ जनवरी को बारामुला जिले में एलओसी से सटे बोनियार तहसील के घग्घर हिल गांव की एक गर्भवती को जवानों ने स्ट्रेचर पर रखकर बर्फबारी के बीच साढ़े छह किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया। तीन घंटे तक लगातार पैदल चलते रहे। 10 जनवरी को डोडा जिले के भद्रवाह इलाके के पहाड़ी गांव मिर्च बाला में सेना एक बार फिर गंभीर रूप से बीमार एक महिला के लिए देवदूत बनकर सामने आई।
उसके पिता की गुहार पर पहुंचे सेना के जवानों ने घुटनों तक बर्फ में दो किलोमीटर चलकर वाहन तक पहुंचाया। इसके बाद पीएचसी भर्ती कराया गया। सैन्य प्रवक्ता कर्नल देवेंद्र आनंद का कहना है कि सेना मानवता की सेवा में हर वक्त तत्पर रहती है। जम्मू-कश्मीर की विषम भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से कई मौकों पर जिंदगी बचाने में जवानों का सहयोग अतुलनीय होता है। कोरोना काल में तो सेना ने अहम भूमिका निभाई है। सेना की मेडिकल पेट्रोल टीम सुदूर के गांव-गांव तक पहुंची है। लोगों को जागरूक करने के साथ ही टीकाकरण में अहम योगदान दिया है।
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