अरुणाचल में तनातनी के बीच भारतीय सेना ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा पर ताकत दिखाई। मैकेनाइज्ड फोर्स की क्षमता बढ़ाने को अभ्यास हुआ, जिसकी समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने की।
अरुणाचल में तनातनी के बीच भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा से सटे दुर्गम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बुधवार को ताकत दिखाई। मैकेनाइज्ड फोर्स की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर अभ्यास किया। इसमें युद्ध क्षेत्र में आवाजाही, टैंकों के साथ सैन्य फॉर्मेशन, निगरानी व्यवस्था और कठिन परिस्थितियों में उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
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सेना के अनुसार लद्दाख के चुनौतीपूर्ण भूभाग में सैन्य अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने के लिए विशेष कौशल, सैनिकों का ऊंचाई के अनुकूल ढलना, टैंक क्रू की दक्षता और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान टैंक फॉर्मेशन, युद्धक्षेत्र में सैन्य उपकरणों की तैनाती और जलमार्गों से जुड़े अभ्यास भी किए गए।
ऊंचाई पर युद्धक क्षमता बढ़ाने पर जोर
लद्दाख में कम तापमान, बर्फीली हवाएं और दुर्गम भूभाग के बीच टैंकों व अन्य सैन्य वाहनों का संचालन चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में सेना का जोर सैनिकों को इन परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने के साथ उपकरणों के रखरखाव और उनकी ऑपरेशनल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है। प्रशिक्षण का उद्देश्य चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी सैन्य अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय और युद्धक तत्परता बनाए रखना है।
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उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने परखी तैयारी
उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बुधवार को कारगिल और बटालिक सेक्टर में सेना की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन क्षेत्रों में तैनात जवानों से बातचीत की और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों तथा प्रतिकूल मौसम में उनके उच्च मनोबल और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को सराहा। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद दोनों देशों के संबंधों का अहम मुद्दा रहा है।