चीन के विरोध और 20 सैनिकों की शहादत से बने तनाव के बीच गलवां नदी पर सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण पुल को सेना ने तैयार कर दिया है। एलएसी पर सबसे महत्वपूर्ण दरबुक से दौलत बेग ओल्डी तक 255 किलोमीटर लंबी सड़क की सुरक्षा के लिहाज से यह पुल खासा महत्व रखता है।
गलवां नदी से गुजरने वाला बर्फीला पानी सैन्य आवाजाही में बाधा बनता था। एक अधिकारी ने बताया कि 60 मीटर लंबे पुल में चार स्पान डाले गए हैं। पहले यह केवल फुट ब्रिज था। अब सेना के भारी वाहनों की आसानी से आवाजाही हो सकेगी।
चीन की सेना (पीएलए) ने इस पुल के निर्माण को रोकने की कई कोशिशें कीं। ऐसे हालात भी बनाए कि पुल का काम रोक दिया जाए, लेकिन तमाम परिस्थितियों का सामना करते हुए पुल को तैयार कर लिया गया है।
पाकिस्तान तक जाना चाहता है ड्रैगन
पूरी गलवां घाटी पर अपना दावा ठोक कर चीन असल में लद्दाख के आखिरी गांव दौलत बेग ओल्डी के मुर्गो क्षेत्र से एक और सड़क बनाकर पाकिस्तान से जुड़ना चाहता है। चीन का पूरी घाटी पर नियंत्रण होने की सूरत में दरबुक-दौलत बेग ओल्डी सड़क का संपर्क चीन कभी भी काटने की स्थिति में होगा। गलवां नदी में मजबूत पुल तैयार होने से अब चीन की किसी भी चुनौती से निपटने में आसानी होगी।