कश्मीरी सेब में हजरत अली, तुरसी, गलामस्त, कंडीसन, रजातवाडी, बेलगेम, बलगेलिन और अमरी गोल्डन प्रजातियां उगाई जाती हैं। इन सेबों की खास बात यह है कि ये मीठे होते हैं। बाजारों में डिमांड ज्यादा रहती है।
कश्मीर घाटी में सेब की बिक्री के लिए बागवानों को सरकार ई मंडियां मुहैया करवाएगी। इसके लिए तमाम औपचारिकताओं को बागवानी विभाग ने पूरा कर लिया है। पहले बागवानों को खुद बाजारों तक सेबों को पहुंचाना पड़ता था। बिचौलियों के माध्यम से फसल बेचनी पड़ती थी। ऐसे में मुनाफा कम ही बच पाता था। इस बार ई मंडियों के माध्यम से फसल बिकने से बिचौलियों के माध्यम से फसल नहीं बिकेगी। बागवानों का सीधा संपर्क बाजार से होगा। खातों में ही फसल बिक्री का पैसा आएगा।
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अब 15 जुलाई के बाद सेबों के पकने के बाद तुड़ाई का काम शुरू हो जाएगा। यह काम सितंबर तक चलेगा। इसमें अलग-अलग किस्मों के सेब बाजारों में उपलब्ध करवाए जाएंगे। साथ ही बागवानों की सेब की फसल घर द्वार पर ही बिक जाएगी और मुनाफा कमा सकेंगे।
कश्मीर घाटी में बीते साल 28 लाख मीट्रिक टन (एमटी) के आसपास पैदावार हुई थी। इस बार 30 लाख एमटी फसल की पैदावार का अनुमान है। सेब प्रदेश और अन्य राज्यों में आपूर्ति किया जाता है। बाजारों में कश्मीरी सेब की डिमांड काफी रहती है।
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पांच प्रतिशत सेब भेजा जाएगा विदेशों में
जुलाई से सितंबर माह तक चलने वाली तुड़ाई के बाद पांच प्रतिशत सेब विदेशों में भेजा जाएगा। इसमें रायल और राइड डिलिशियस प्रजातियां शामिल हैं। यहां से बागवानों को अच्छी खासी कमाई होती है। इसके लिए भी ऑर्डर इसी माह आने शुरू होते हैं।
रायल और राइड डिलीशियस प्रजाति के सेब की तुड़ाई सितंबर माह के दौरान होगी। यह सेब विदेशों में भेजा जाएगा। अक्तूबर माह से सेब बाजारों में पहुंचता है। सेबों की प्रजातियां तैयार हो रही हैं। जुलाई माह से इनकी तुड़ाई शुरू होती है जो सितंबर माह तक चलती है। तुड़ाई के बाद सेब बाजारों में आना शुरू हो जाता है। - राम सेबक, निदेशक, बागवानी विभाग