जम्मू संभाग के भद्रवाह की चेस प्लेयर आरुषि कोतवाल अपने खेल से राज्य का नाम रोशन कर रही हैं। उसने अपनी प्रतिभा के दम पर छोटी सी आयु में ही शतरंज की चालों से कई मुकाम हासिल किए हैं। बीएसएफ में तैनात पिता से बचपन में सीखी शतरंज की बाजियों ने ऐसा हौसला दिया की उसने सबसे कम उम्र में शेर-ए-कश्मीर अवार्ड अपने नाम किया।
बीएसएफ पलौड़ा में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली आरुषि कोतवाल को बचपन से ही चेस का शौकहै। उसने अब तक 30 राष्ट्रीय और 11 अतंराष्ट्रीय चेस प्रतियोगिता में भाग लेकर कई मेडल अपने नाम किए हैं। वर्ष 2011 में सात वर्ष की आयु में उसने पहली बार अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था। इसके बाद सिलसिला चल निकला और 2012 में दिल्ली और 2016 में जम्मू में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 4 गोल्ड मेडल जीत कर राज्य का नाम रोशन किया।
वह 2012 में सबसे कम उम्र की उम्र में शेर-ए-कश्मीर अवार्ड जीने वाली पहली लड़की बनी थी। वर्ष 2016 में उसे ‘स्टेट अवार्ड’ से नवाजा गया। जुलाई 2018 में श्रीलंका में हुई चेस चैंपियनशिप में आरुषि ने 3 सिल्वर और एक ब्रांज मेडल अपने नाम किया था। नवंबर 2018 में उज्बेकिस्तान के ताशकंद में हुई चेस प्रतियोगिता में एक सिल्वर मेडल के साथ वर्ल्ड चेस फेडरेशन ने आरुषि को ‘वुमन कैंडीडेट मास्टर’ के खिताब से सम्मानित किया।