मुझे इस प्रतियोगिता में भाग लेकर काफी अच्छा लगा। इस तरह की गतिविधियां आगे भी हमारे स्कूल में होती रहनी चाहिए। छात्राओं के लिए अपनी बात सबके आगे रखने के लिए अच्छा तरीका है। -गुनगुन महंत, छात्रा
यह अभियान प्रशंसा के लायक है। इससे छात्राओं का मनोबल बढ़ता है और उन्हें महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर विचार प्रस्तुत करने का मौका मिलता है।
-संगीता, छात्रा
यह पहल लड़कियों को जागरूक कर रही है। अपराजिता जैसा अभियान नारी के अधिकार की आवाज है। महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में भी पता चलता है।
-निशा, छात्रा
मुझे लगता है कि लड़कियों को कभी भी खुद को कम नहीं समझना चाहिए। वह हर क्षेत्र में लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं। गलत करना या गलत सहना दोनों ही गलत है।
-अनुराधा, छात्रा
अपराजिता कार्यक्रम एक मुहिम के रूप में देश में जागरूकता लाने का काम कर रहा है। यह महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे को समाज में उठाने के लिए अच्छा तरीका है।
-नीरू राजपूत, प्रिंसिपल
यह अभियान समाज में महिला सशक्तिकरण में काफी बड़ा योगदान दे रहा है। आज हर क्षेत्र में नारी ने अपना प्रबल स्थान बनाया है। सभी को चाहिए कि वह अपनी बेटियों को पढ़ने दें और समाज का सामना करने के लिए सक्षम बनाएं।
-मोनिका कोतवाल, शिक्षिका
एक पुरुष पढ़ता है तो केवल एक परिवार पढ़ता है पर जब एक महिला को पढ़ाया जाता है तो दो परिवार पढ़ते हैं। समाज की दिशा को निर्धारित करने के लिए महिला वर्ग को पर्याप्त अवसर प्रदान करने होंगे।
-राजेश रानी, शिक्षिका