पौनी के झंडी मोड स्थित जियारत पर 17 जनवरी से जारी है आठ दिवसीय मेला
मंगलवार को होगा समापन, प्रतिदिन माथा टेक रहे सभी समुदायों के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
पौनी। तहसील के झंडी मोड भारख स्थित जियारत पर हर वर्ष आयोजित किए जाने वाले आठ दिवसीय उर्स मेले की शुरूआत 17 जनवरी को हुई है। इस मेले में धार्मिक सौहार्द व आपसी भाईचारे की मिसाल देखने मिलती है। यहां हिंदुओं के लिए अलग और मुस्लिमों के लिए अलग खाना बनाया और परोसा जाता है। यह मेले की खास बात है।
मेले के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा प्रदेश तथा बाहरी राज्यों के लोग माथा टेकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मेले के दौरान बनाए जाने वाले खाने को हिंदू समुदाय के लिए अलग तथा मुस्लिम समुदाय के लिए अलग से बनाया जाता है। अलग-अलग स्थानों पर बैठा कर दोनों समुदाय के लोगों को परोसा भी जाता है। उर्स मेले में सहयोग देने वालों के मुताबिक हिंदू समुदाय के लिए अलग से वैष्णो खाना बनाया जाता है। उनकी अलग से रसोई होती है, ताकि किसी के धर्म को ठेस न पहुंचे।
मेले के दौरान सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदू व सिख भी आते हैं, और जियारत में माथा टेकते हैं। रविवार को भी मेले में माथा टेकने वालों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान लगभग आधा किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लगी रहीं। 17 जनवरी से शुरू हुआ उर्स मेला मंगलवार को समपन्न होगा। जियारत पर मियां मोहम्मद इस्माईल साहिब खसुसी दुआ पढ़ेंगे।
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झरने में नहाने से बीमारी मुक्त होने की मान्यता
जिले के श्रीमाता वैष्णो देवी कटड़ा के बाद दूसरे सबसे बडे़ धार्मिक स्थल शिवखोड़ी रनसू धाम मार्ग पर भारख में स्थित जियारत वर्षों पुरानी है। शिवखोड़ी की तरफ आने जाने वाले यात्री यहां थोड़ी देर रुक कर माथा जरूर टेकते हैं। स्थानीय लोगों में जियारत के प्रति काफी आस्था है। जियारत के कुछ दूरी पर ढलान में झरना भी है, जिसमें पूरे साल पानी बहता रहता है। मान्यता है कि उक्त झरने के पानी में नहाने से कई प्रकार के चर्म रोग दूर होते हैं, वहीं पेट संबंधी बिमारियां भी ठीक होती हैं।