जम्मू-कश्मीर की पांच संसदीय सीटों में 1833571 वोटरों वाली सबसे बहुचर्चित सीट रही अनंतनाग-राजोरी से जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उम्मीदवार मियां अल्ताफ अहमद ने रिकॉर्ड जीत हासिल की है। पहली बार संसदीय चुनाव में उतरे मियां अल्ताफ अपनी धार्मिक व साफ छवि से हर वर्ग के मतदाताओं का दिल जीतकर पहली बार सांसद बने। गुज्जर-बकरवाल, पहाड़ी और कश्मीरी मतदाताओं वाली इस सीट पर कुल 20 उम्मीदवार चुनाव मैदान थे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी थीं।
मियां अल्ताफ 2,81,794 वोटों से जीते। उन्हें कुल 5,21,836 वोट मिले। महबूबा मुफ्ती दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें 2,40,042 वोट मिले। अपनी पार्टी के जफर इकबाल मन्हास 1,42,195 वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे। भाजपा ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। उन्होंने यहां अपनी पार्टी को समर्थन दिया था।
हमेशा से मुस्लिम बहुल रही अनंतनाग सीट पर 2024 का चुनाव परिसीमन के बाद हुआ। इसमें हिंदू वोटर जोड़े गए। पुंछ और राजोरी जिले की कुछ विधानसभा सीटों को अनंतनाग-सीट में जोड़ा गया। मियां अल्ताफ अहमद के सामने इसी सीट से दो बार सांसद रहीं महबूबा मुफ्ती की चुनौती के साथ पहली बार चुनाव मैदान में उतरी अपनी पाटी और डीपीएपी के उम्मीदवार भी थे।
मियां अल्ताफ साफ-सुथरी छवि के दम पर मतदाताओं को साधने में कामयाब रहे। उन्होंने इस सीट पर कुल 1833571 वोट में 517489 यानी 50.86 वोट हासिल किया। अनंतनाग-राजोरी सीट में 26 हजार कश्मीरी विस्थापित मतदाता थे, जिनके वोट भी काफी निर्णायक साबित हुए। इस सीट पर पहले मतदान तीसरे चरण में होना था, लेकिन इसमें बदलाव कर मतदान 25 मई को हुआ।
ऐसे में पांच संसदीय सीटों में अनंतनाग-राजोरी एक मात्र सीट थी, जिसमें उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए सबसे लंबा समय मिला था। इस सीट पर 52.28 फीसदी मतदान हुआ था, जो आतंकवाद के दौर में 1989 के 35 साल बाद सबसे अधिक था। इससे पहले 1996 में 50.20 फीसदी मतदान हुआ था। 2019 में इस सीट पर मात्र 8.89 प्रतिशत मत पड़े थे। पहली बार सांसद बनने के बाद मियां अल्ताफ अहमद ने अपने समर्थकों के साथ विजय रैली निकाली, जिसमें उन्होंने लोगों को इस समर्थन के लिए धन्यवाद किया।