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अनंतनाग: संपत्ति के लिए भाई की हत्या करने वाले को उम्र कैद, कोर्ट ने दस हजार का जुर्माना भी लगाया

Sun, 27 Feb 2022 02:56 PM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर

सार

अदालत ने कहा कि मौत की सजा केवल दुर्लभतम मामलों में ही दी जानी चाहिए। आजीवन कारावास एक नियम है और मौत की सजा एक अपवाद है। अपराध के अंतिम शिकार मृतक के परिवार होते हैं।
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court demo - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संपत्ति के लिए भाई की हत्या करने वाले गुलाम नबी को अनंतनाग की जिला अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही हत्यारे पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। गुलाम नबी ने वर्ष 2013 में भाई शफी मोहम्मद की हत्या कर दी थी। शफी की उम्र उस समय 33 वर्ष थी।

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अनंतनाग के प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश नसीर अहमद डार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सबूतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत की राय है कि फांसी की सजा के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। इसलिए उम्र कैद की सजा देना उचित होगा।

अदालत ने कहा कि मौत की सजा केवल दुर्लभतम मामलों में ही दी जानी चाहिए। आजीवन कारावास एक नियम है और मौत की सजा एक अपवाद है। अपराध के अंतिम शिकार मृतक के परिवार होते हैं। यह बताया गया है कि मृतक के परिवार में वृद्ध पिता, विधवा और तीन बच्चे हैं और घटना के समय सभी बच्चे नाबालिग थे। 

 

अभी भी तीन में से दो बच्चे एक बेटी सहित नाबालिग हैं। अदालत ने कहा, दोषी को सजा सुनाते समय पीड़ितों के मुआवजे के सवाल को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अदालत ने मोहम्मद शफी भट को अपने भाई की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद सजा सुनाई है।

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परिवार को दो लाख की सहायता देने की सिफारिश
अदालत ने सिफारिश की कि सदस्य सचिव जम्मू - कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण मृतक के कानूनी वारिसों के पक्ष में उनकी मां मुनीरा बेगम के माध्यम से 2 लाख रुपये की राशि जारी करेगा। दो लाख रुपये में से 50,000 रुपये मृतक के पिता गुल मोहम्मद भट को दिए जाएंगे।

यह था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 मार्च 2013 को पुलिस स्टेशन मट्टन को सूचना मिली कि मोहम्मद शफी भट पर कुछ लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। उसे गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया था। स्थिति बिगड़ने पर शफी को श्रीनगर ले जाया गया जहां 20 मार्च 2013 को उसकी मौत हो गई।

 

17 मार्च 2013 को पुलिस ने संदेह के आधार पर गुलाम नबी भट को पूछताछ के लिए थाने बुलाया, जहां पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि गुलाम नबी की नजर शफी की संपत्ति पर थी। और उसने सभी घर वालों के बाहर जाने के बाद अकेला पाकर उसकी हत्या कर दी। 

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