दोमाना। गांव घो मन्हासा निवासी फलेल सिंह मन्हास अपने बेटे सोनू की याद में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित करवा रहे हैं। इसके छठे दिन कथावक्ता श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नंदकिशोर दास महाराज व्यास ने भगवान की अनेक लीलाओं में से रास लीला को श्रेष्ठतम बताया। उन्होंने कहा कि रास तो जीव के शिव से मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं बल्कि काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया लेकिन वह भगवान को पराजित नहीं कर पाया और उसे ही परास्त होना पड़ा।
रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है। गोपी गीत के बारे में व्यास ने कहा कि जीव में अभिमान आने पर भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है, तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं। उसे दर्शन देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मिणि के साथ संपन्न हुआ लेकिन रुक्मिणि को श्रीकृष्ण ने हरण कर विवाह किया गया।
इस कथा में समझाया गया कि रुक्मिणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकतीं। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नहीं तो फिर वह धन चोरी, बीमारी या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है, तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: प्राप्त हो जाती है। इसलिए धन को परमार्थ में ही लगाना चाहिए। कथा का आयोजन करवाई जा रही है।