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जानिए क्या है मिशन 44+ के लिए शाह का प्लान

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भाजपा के मिशन कश्मीर के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने व्यूहरचना कर ली है। गेम प्लान में जम्मू संभाग के अलावा कश्मीर संभाग की 15 सीटों पर विशेष जोर लगाया जाएगा और लद्दाख की चार सीटें झटकने की जुगत भिड़ाई जाएगी।
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शाह को भरोसा है कि जम्मू संभाग की 37 सीटों में से कम से कम 25 पर भाजपा अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। इसके लिए दूसरे दलों से भी योद्धाओं को जुटाने का अभियान शुरू हो गया है।

साफ और बेदाग छवि वाले अफसरों को पार्टी में स्थान दिया जा रहा है। रविवार को ऐसे ही अफसरों को पार्टी में शामिल किया जा सकता है।

शाह तय करेंगे किसे मिलेगा ट‌िकट

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार जम्मू कश्मीर के दौरे पर पहुंचे शाह ने पहले पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक में नब्ज टटोली और बाद में विधायकों समेत तमाम प्रमुख पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात कर हालात को परखा।

इसी क्रम में प्रत्याशियों के चयन की कवायद भी चलती रही। शाह ने विधानसभा की कुल 87 सीटों में से 44 प्लस हासिल कर अपने बूते सरकार बनाने की रणनीति बनाई है। जम्मू कश्मीर में मुस्लिम वोट बैंक के ध्रुवीकरण का भी अहसास शाह को है।

लिहाजा गठबंधन के लिए भी विकल्प खुले रखे गए हैं। खासकर कश्मीर में भाजपा को वैशाखी की जरूरत महसूस हो रही है।

शाह ने उड़ाई कांग्रेस की नींद

यही कारण है पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन से पार्टी की चुनाव बाद गठबंधन के लिए बातचीत हुई है। लोन का कश्मीर की कम से कम छह सीटों पर खासा प्रभाव माना जाता है।

शाह की इस रणनीति ने कांग्रेस की भी नींद उड़ाई है। भाजपा कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी से इतर उन छोटे दलों पर डोरे डाल रही है जो एक-दो सीटें भी जीतने का माद्दा रखते हैं।

इस रणनीति को विफल करने के लिए राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने शाह के दौरे से एक दिन पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के चेयरमैन खान साहब हकीम मोहम्मद यासिन से मुलाकात कर गुफ्तगू की।

कांग्रेस को आशंका थी कि यासिन भाजपा के साथ जा सकते हैं। इससे पहले लोन और भाजपा महासचिव जेपी नड्डा की मुलाकात हो चुकी है।
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शाह के ल‌िए चुनौती है लद्दाख

लोकसभा चुनाव में रियासत की 41 सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। इस आंकड़े ने भाजपा का उत्साह बढ़ाया है। जम्मू संभाग की 37 सीटों में से 20-25 पर भाजपा जोर लगा रही है।

कश्मीर की 46 और लद्दाख की चार सीटें भाजपा के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। कश्मीर में आम तौर पर मतदान का प्रतिशत कम रहता है।

शाह की रणनीति है कि कम वोट पड़ने की स्थिति में अगर भाजपा दमदार उम्मीदवार दे तो बाजी मार ली जा सकती है। लिहाजा हीना भट जैसे चेहरे को पार्टी में लाया गया है।
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