गृह मंत्री अमित शाह के दौरे की तैयारियों के बीच पहाड़ियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की घोषणा की सुगबुगाहट के मद्देनजर गुज्जर बक्करवाल एकजुट होने लगे हैं। वे पहाड़ी समुदाय को दर्जा दिए जाने की खिलाफत कर रहे हैं। राजोरी व पुंछ दोनों ही जगह गुज्जर बक्करवाल सभाएं कर अपने समाज को एकजुट होकर संघर्ष का आह्वान कर रहे हैं। इस बीच गुज्जर बक्करवालों के विरोध को थामने की भाजपा ने रणनीति बनाई है। गुज्जर नेताओं को राजोरी में शाह के साथ मंच साझा करने की सहमति बनी है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी के लिए सब समान हैं। पहाड़ियों के साथ ही गुज्जर बक्करवालों को भी पार्टी पूरी तवज्जो देती है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने गुज्जर बक्करवाल समुदाय से जुड़े पूर्व सांसद तालिब हुसैन तथा पूर्व मंत्री अब्दुल गनी कोहली को मंच पर अमित शाह के साथ बैठाने का फैसला किया है। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि दोनों का गुज्जर बक्करवाल समुदाय में अच्छा खासा प्रभाव है। दोनों को गृह मंत्री के साथ बैठाकर यह संदेश भी देने की कोशिश है कि भाजपा गुज्जरों का भी पूरा सम्मान करती है। पार्टी ने गुज्जरों के हित में कई काम किए हैं तथा उन्हें राजनीतिक रूप से भी सशक्त बनाया है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि भाजपा घर-घर जाकर यह संदेश देने की भी कोशिश कर रही है कि गृह मंत्री अमित शाह की रैली पार्टी की ओर से आयोजित की गई है न कि पहाड़ियों की ओर से। पार्टी के लिए पहाड़ी व गुज्जर सभी बराबर है। सभी का पार्टी में सम्मान है। पार्टी सबका साथ सबका विकास के साथ ही समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रयासरत है। रैली की तैयारियों से जुड़े पूर्व एमएलसी विबोध गुप्ता का कहना है कि रैली में अधिकाधिक संख्या में राजोरी व पुंछ के लोगों को लाने की तैयारी की जा रही है। इसमें पहाड़ियों के साथ ही गुज्जर बक्करवाल तथा अन्य समुदाय के लोग भी होंगे।
पहाड़ी समुदाय के लोग घर-घर कर रहे रैली में शामिल होने की अपील
पुंछ तथा राजोरी में पहाड़ी समुदाय के लोग घर-घर जाकर सभी से शाह की रैली में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। दूरदराज के इलाकों के साथ ही एलओसी से सटे क्षेत्रों में भी दिन रात पहाड़ी समुदाय के लोग रैली को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। पहाड़ी नेता नदीम खान का कहना है कि उम्मीद है कि पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा दिए जाने की घोषणा होगी। पिछले तीस साल से पहाड़ी समुदाय संघर्षरत है। पहाड़ियों में रैली को लेकर जबर्दस्त उत्साह है।