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अमरनाथ यात्रा : बाबा बर्फानी के भक्तों के लिए हेलिकॉप्टर की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

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- इस बार श्रीनगर और नीलग्राथ के बीच यात्रा के लिए चार्टर सुविधा
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- चार्टर उड़ान के लिए 450 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए समूह का संचयी वजन
- मुख्य यात्री के साथ अधिकतम पांच यात्रियों को सह यात्री के रूप में जोड़ने का प्रावधान

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। 29 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा के लिए हेलिकॉप्टर की ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है। शुक्रवार शाम तक 50 से अधिक यात्रियों ने बुकिंग करवा ली थी। इसमें नीलग्राथ-पंजतरणी-नीलग्राथ (बालटाल) और पहलगाम-पंजतरणी-पहलगाम रूट रहता है। इस बार चार्टर बुकिंग केवल श्रीनगर और नीलग्राथ के बीच यात्रा के लिए दी गई है, जिसमें नीलग्राथ और पंजतरणी के बीच चलने वाली कनेक्टिंग शटल में प्राथमिकता वाली सीटें होंगी। चार्टर हेली सेवा के लिए 3.50 लाख रुपये शुल्क रखा गया है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में एक बार टिकट बुक हो जाने के बाद रिफंड, पुनर्निर्धारण, रद्दीकरण, संपादन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बोर्ड के अनुसार, ऑनलाइन बुकिंग के दौरान यात्री को सटीक वजन की जानकारी देनी होगी। यह अनिवार्य है कि चार्टर उड़ान के लिए समूह का संचयी वजन 450 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चार्टर के लिए बुक किए गए यात्रियों की है। हेली ऑपरेटर को समूह से केवल उतने यात्रियों को ले जाने का अधिकार है, जिनका संचयी वजन 450 किलोग्राम के भीतर है। ऐसी स्थिति में श्राइन बोर्ड या हेली ऑपरेटर पर बुक की गई राशि का पूरा/आंशिक धन वापस करने या छूटे हुए यात्रियों के लिए अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने का कोई दायित्व नहीं होगा।
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श्राइन बोर्ड के नियमों के तहत मुख्य यात्री के साथ अधिकतम पांच यात्रियों को सह-यात्री के रूप में जोड़ा जा सकता है। सह-यात्री विवरण एक बार दर्ज किए जाने के बाद फ़्रीज कर दिया जाना चाहिए। उसके बाद ही सह-यात्री विवरण बुकिंग सूची में देखा जा सकेगा। मुख्य यात्री और सह-यात्रियों का विवरण एक बार फ़्रीज होने के बाद संपादित नहीं किया जा सकता है। टिकट बुक करते समय केवल चयनित यात्रियों पर ही विचार किया जाएगा।
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तीर्थयात्री को मूल फोटो पहचानपत्र और
अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र साथ रखना होगा
टिकट के लिए भुगतान करने की ओर बढ़ने से पहले यात्री को मार्ग, तिथि और स्लॉट के साथ यात्री सूची की पुष्टि करनी होगी। चूंकि पंजतरणी हेलीपैड से पवित्र गुफा तक और वापस यात्रा में काफी समय लगता है, इसलिए हेली यात्रा के लिए आने-जाने के बीच उपलब्ध स्लॉट कम से कम 6 घंटे के अंतराल के साथ दिखाई देंगे। प्रत्येक हेली यात्री को यात्रा के दौरान अपने साथ अपना मूल फोटो पहचान पत्र और अधिकृत डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षरित और मुहर लगा अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाण पत्र साथ रखना होगा। यदि कोई हेली यात्री 12 बजे के बाद के स्लॉट के लिए टिकट (आगे/वापसी) बुक करता है, तो उसे दर्शन के बाद पंजतरणी लौटने के लिए आवश्यक समय और दृश्यता/मौसम की स्थिति आदि के कारण देर रात में हेली संचालन न करने के कारण पंजतरणी में रुकना पड़ सकता है। पंजतरणी में सशुल्क आवास व्यवस्था उपलब्ध है।
हेली ऑपरेटर को किसी दिए गए सॉर्टी के संचालन के लिए कुछ न्यूनतम यात्रियों की आवश्यकता हो सकती है। इस संबंध में जो निर्णय हेली ऑपरेटर द्वारा लिया जाएगा वह अंतिम होगा। यात्रियों को बुक किए गए स्लॉट समय से कम से कम 30 मिनट पहले संबंधित हेलीपैड पर रिपोर्ट करना होगा। सभी विवाद जम्मू-कश्मीर की अदालतों के विशेष अधिकार क्षेत्र के अधीन होंगे।
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शिवभक्तों की सेवा के लिए देशभर से पहुंचने लगे लंगर संगठन

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कई जगह लंगर स्थापित किए जा रहे

अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां तेज की गई हैं। शिवभक्तों की सेवा के लिए देशभर से जम्मू-कश्मीर में लंगर संगठनों का पहुंचना शुरू हो गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह लंगर स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें श्रद्धालुओं को पौष्टिक आहार के साथ लजीज व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका मिलेगा। लंगर स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इन पर दिनरात आध्यात्मिक गतिविधियों से पूरा माहौल शिवमयी बना रहेगा।
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जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर करोल कुंडी रामबन में श्री अमरनाथ मणिमहेश सेवा मंडल (पंजीकृत) जगाधरी यमुनानगर हरियाणा की ओर से विशाल लंगर स्थापित किया जा रहा है। संगठन के प्रधान पवन महेश्वरी ने बताया कि वह 2005 से शिव भक्तों की सेवा कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए लंगर शुरू कर दिया गया है, लेकिन औपचारिक तौर पर 20 जून से लंगर को पूरी तरह से शुरू किया जाएगा। इसमें अमरनाथ यात्रियों के साथ सभी लोगों और आम यात्रियों को भी शिव प्रसाद दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर साल यात्रा पर आतंकवाद का साया रहता है, लेकिन भगवान शिव हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। हमें किसी चीज का डर नहीं है, क्योंकि हमारे सुरक्षाबल हमारी पूरी सुरक्षा कर रहे हैं। लंगर स्थल पर भी सुरक्षाकर्मी तैनात है। श्रद्धालुओं की सेवा करने में जो सुख मिलता है, वे कहीं पर नहीं है। इसी तरह पारंपरिक बालटाल और पहलगाम रूट पर सौ से अधिक लंगर लगाए जा रहे हैं। प्रदेश के प्रवेशद्वार लखनपुर से पूरे यात्रा रूट पर लंगर संगठन भोले के भक्तों की सेवा में जुटे रहते हैं।
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