मंदिरों के शहर में पहुंचते ही लगा जैसे पूरा शहर हमारी सेवा में लगा है। जगह-जगह लंगर, चाय और ठहरने की व्यवस्था ने सफर को आसान कर दिया। यह कहना है बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं का।
मंदिरों के शहर में पहुंचते ही लगा जैसे पूरा शहर हमारी सेवा में लगा है। जगह-जगह लंगर, चाय और ठहरने की व्यवस्था ने सफर को आसान कर दिया। यह कहना है बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं का। दिल्ली से पहुंचे तीर्थयात्रियों ने बताया कि बारिश और लंबी कतारों में परेशानी जरूर हुई लेकिन बाबा के दर्शन की आस्था के आगे यह सब छोटा लगता है।
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अमरनाथ यात्रा के दौरान हर श्रद्धालु अपने साथ अलग अनुभव लेकर लौट रहा है। किसी के लिए यह सेवा और समर्पण की मिसाल है तो किसी के लिए व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत का संदेश। भगवती नगर यात्री निवास से लेकर तवी रिवर फ्रंट तक श्रद्धालुओं से बातचीत में यात्रा के कई रंग सामने आए।
श्रद्धालुओं की राय
लंगरों की सेवा ने मन जीत लिया। कहीं भूखे नहीं रहना पड़ा। स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से लगाए गए लंगरों ने घर जैसा अपनापन दिया। - सविता देवी, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
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टोकन और पंजीकरण के लिए बारिश के बीच थोड़ी परेशानी हुई लेकिन कर्मचारियों ने तुरंत सफाई और पानी की निकासी शुरू कर दी। - लखन सिंह, गोंडा (उत्तर प्रदेश )
टोकन और कतार व्यवस्था में थोड़ा सुधार हो तो यात्रा और सुगम हो सकती है। लोगों को तीन-तीन दिन तक लाइन में लगना पड़ रहा है। घंटों जाम से जूझना पड़ रहा है। प्रशासन को इस पर विचार करना चाहिए। - धीरेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक बलरामपुर (यूपी)
बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी के आगे सारी थकान और परेशानियां खत्म हो जाती हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर की नहीं। इसमें सुधार लाने की जरूरत है। - सीता राम, पश्चिम बंगाल