इस बार बोर्ड ने युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू की थीं। उप-राज्यपाल और श्राइन बोर्ड के सीईओ की अध्यक्षता में कई बैठकें हो चुकी थीं। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार छह लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऑनलाइन यात्रा पंजीकरण भी शुरू किया गया था, लेकिन अप्रैल में संक्रमण बढ़ने पर इसे रोकना पड़ा।