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Amarnath Yatra : एमपी के संजीत दास संग नटखट वानर रामकली भी करेगी बाबा बर्फानी के दर्शन, खास है ये कहानी

Thu, 04 Jul 2024 03:24 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

साधु और रामकली के बीच जुड़ाव देखते ही बन रहा था। हालांकि अधिक लोगों के पास होने पर रामकली कुछ असहज भी हुई। लेकिन संजीत दास के साथ वह खुद को सुरक्षित पा रही थी।
 
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जम्मू - फोटो : अभिषेक बड़ू
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विस्तार
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दोपहर में उमस से परेशान होते हम जैसे ही पुरानी मंडी स्थित राम मंदिर के हाल में पहुंचे तो वहां बम बम भोले के जयघोष हमें सुनाई देने लगे। इसी बीच एक साधु के संग नटखट-से वानर ने हमारा ध्यान खींचा। पास गए तो साधु जिनका नाम संजीत दास जैन है, ने बताया कि वह मध्य प्रदेश दमोह जिले के रहने वाले हैं। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए दूसरी बार वानर रामकली को साथ निकले हैं।

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साधु और रामकली के बीच जुड़ाव देखते ही बन रहा था। हालांकि अधिक लोगों के पास होने पर रामकली कुछ असहज भी हुई। लेकिन संजीत दास के साथ वह खुद को सुरक्षित पा रही थी।

उन्होंने बताया कि यह उनकी 29वीं यात्रा है। राम मंदिर में उन्होंने 18 साल सेवा की है। वह यहां के सेवादार भी हैं। वह दूसरी बार अपने साथ रामकली को साथ लेकर आए हैं। यह भोले नाथ भगवान की कृपा है। 1991 से जम्मू आ रहे हैं। यहां सभी सुविधाएं बेहतर तरीके से की गई हैं।
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कैसे मिली रामकली

साधु ने बताया कि एक चालक ने उन्हें रामकली को बहुत छोटी उम्र में यह कहकर सौंपा था कि इसकी मां खत्म हो गई है। ऐसे में वह इसका कुछ दिन ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि इसके बड़े होने पर उन्होंने रामकली को अपने से अलग करना भी चाहा, लेकिन वह फिर लौट कर वापस उनके पास आ जाती है। तो ऐसे में उन्होंने इसे अपने साथ ही रखा है।

पिछली बार नहीं हो पाए थे दर्शन

संजीत दास ने बताया कि पिछली बार वह रामकली के साथ दर्शन करने के लिए आए थे। लेकिन संगम से ही उन्हें वापस आना पड़ा था। क्योंकि उनके पैरों में मोच आ गई थी। बाबा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि इस बार वह दर्शन करके ही लौटेंगे। चाहें इसके लिए उनकी भगवान के साथ लड़ाई भी हो जाए।
 
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छह फीट लंबी जटाओं संग पहुंचे दुलार चंद देवनाथ

साधु जीवन त्याग और प्रतिबद्धता का रास्ता है। इसके साथ ही ईश्वर के लिए मोह का भी मार्ग है। इसके कई उदाहरण अमरनाथ यात्रा के दौरान देखने को मिल रहे हैं। हजारों की संख्या में देशभर से साधु सन्यासी बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। राम मंदिर में करीब छह फीट लंबे जटाओं वाले दुलार चंद्र देवनाथ भी पहुंचे। पंजीकरण कराने के बाद वह अपनी बारी के इंतजार कर रहे हैं।

अमर उजाला से बातचीत के दौरान दुलार चंद्र देवनाथ ने बताया कि वह कोलकाता के रहने वाले हैं। साधु जीवन में आने के साथ ही उनका ईश्वर के प्रति लगन जुड़ गई और उसके बाद से ही उन्होंने अपनी जटाओं को अपने से अलग नहीं किया है। तेज गर्मी और उमस के बीच यहां हम अपने छोटे बालों से भी परेशान हो उठते हैं वहां इतनी लंबी जटाओं के साथ जीवन व्यतीत करना प्रतिबद्धता की निशानी तो कहा ही जा सकता है।

साधु दुलार चंद्र ने यह भी बताया कि इन जटाओं की देखभाल करना आसान नहीं है। इसे साफ करने में कई दिक्कतें भी आती है। क्योंकि इन्हें धोने के बाद लंबे समय तक इनके सूखने का इंतजार करना होता है। समय के साथ वह इसके साथ परिपक्व होते गए हैं। 
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