जम्मू-कश्मीर में एमएसएमई सेक्टर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कारोबारी कह रहे हैं कि टैक्स का बोझ, कच्चे माल पर महंगाई, योजनाओं का टोटा और ढांचागत कमी ने उनकी हालत खराब कर दी है। जीएसटी रिफंड और टर्नओवर इंसेंटिव समय पर न मिलने से कारोबारियों की पूंजी फंस गई है। नई केंद्रीय क्षेत्र योजना (एनसीएसएस) बंद हो जाने और भूमि आवंटन में पारदर्शिता न होने से निवेश ठप पड़ गया है। उद्योगों की ऐसी कई मुश्किलों को उद्यमियों ने शनिवार को अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में रखा।
कॉन्क्लेव के पहले सत्र में उद्यमियों ने कहा कि उद्योग पूरी तरह परिवहन पर निर्भर हैं लेकिन हाईवे बंद रहना, सड़कों की जर्जर हालत और बिजली संकट कारोबार की कमर तोड़ रहा है। बीमा कंपनियां बाढ़ रिस्क कवर से इन्कार करती हैं जबकि हाल के वर्षों में ऑपरेशन सिंदूर, आतंकी हमले और बाढ़ ने उद्योगों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है। कारोबारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हालात अगर ऐसे ही रहे तो स्थानीय उद्योग बंद होंगे, सर्विस सेक्टर डगमगाएगा और रोजगार की तलाश में युवा बड़ी संख्या में पलायन करेंगे।
- राकेश वजीर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ज्यादातर कच्चा माल बाहर से आता है। लागत पहले ही बढ़ी हुई है ऐसे में और टैक्स लगाना ठीक नहीं। उन्होंने सर्विस सेक्टर को टैक्स से छूट और बेहतर बिजली व्यवस्था की मांग की।
- राहुल सहाय ने कहा कि स्थानीय उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। एनसीएसएस का फायदा औद्योगिक इकाइयों तक नहीं पहुंच पाया। उद्योग परिवहन पर निर्भर हैं और हाईवे बंद होते ही काम ठप पड़ जाता है। जब कोई यूनिट लगाने में ही 100 दिन से ज्यादा लग जाएं तो कारोबार आसान कैसे हो सकता है।
- संजय बंसल ने कहा कि एनसीएसएस बंद होना उद्योगों के लिए बड़ा झटका है। बीमा कंपनियां बाढ़ रिस्क कवर नहीं देतीं। भूमि आवंटन की प्रक्रिया अपारदर्शी है। टर्नओवर इंसेंटिव और एसजीएसटी रिफंड भी समय पर नहीं मिलता।
- संदीप मित्तल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ से उद्योगों को भारी नुकसान हुआ। कारोबारियों को मुआवजा मिलना चाहिए। जीएसटी रिफंड में बहुत परेशानी है, इस पर तिमाही बैठक होनी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों की मरम्मत भी तुरंत जरूरी है।
- विराज मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी क्लेम मिलने में सालभर लग जाता है। पूंजी फंसने से कामकाज ठप पड़ रहा है। नए उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है लेकिन पुराने उद्योगों की सुध कोई नहीं ले रहा। पहलगाम हमले, बाढ़ और ऑपरेशन सिंदूर से कारोबार अप्रैल से ही संकट में है।
- साहिल महाजन का कहना था कि जम्मू में बड़े शहरों की तरह भारी वाहनों के लिए ऑटोमोबाइल सर्विस क्लस्टर होना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों पर सरकार का फोकस है लेकिन ढांचा तैयार ही नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि बैंकों को दावों का निस्तारण तय समयसीमा में करना चाहिए।
- प्रवीण परगाल ने कहा कि उद्योगों के सामने सबसे बड़ी समस्या टर्नओवर इंसेंटिव और जीएसटी रिफंड की है। 2017 से फंसा भुगतान अब तक नहीं मिला है।
- हरविंदर सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर चारों ओर से जमीन से घिरा है, ऐसे में कच्चा माल मंगाना और भेजना बहुत महंगा पड़ता है। सरकार के सभी विभागों को स्थानीय उत्पादों की खरीद करनी चाहिए और नई इकाइयों को सस्ती जमीन उपलब्ध करानी चाहिए।