ए बी सी की तरह क ख ग भी बेहद जरूरी है। ज्यादातर युवा यदि हिंदी से कट गए तो उनके लिए अपने देश का इतिहास, संस्कृति और भावना को समझना मुश्किल हो जाएगा। हिंदी भाषा के शोधार्थियों ने हिंदी के प्रोत्साहन के लिए इंटरनेट को सबसे बड़ा मंच बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी में हिंदी के उपयोग को बढ़ाना होगा।
हिंदी केवल एक भाषा नहीं है यह भारत की संस्कृति, व्यवहार और विचार है। लोगों, समाज और राष्ट्र को आपस में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से जोड़ती है। हिंदी की इस गरिमा को बनाए रखने के लिए हमें हिंदी भाषा को बढ़ावा देना होगा। संवाद और अभिव्यक्ति के सबसे बड़े मंच इंटरनेट पर हिंदी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके हिंदी को नई बुलंदियों पर ले जाया जा सकता है। समाज से हम नहीं बल्कि हमसे समाज है, जैसे हम होंगे वैसा समाज होगा। देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हिंदी को बढ़ावा देना सबका फर्ज है तभी परिणाम सामने आएंगे।
- कोशिका, हिंदी विभाग स्कॉलर जम्मू विश्वविद्यालय
हिंदी मातृभाषा है, इसे अपनाना बेहद जरूरी है। देश में जितने भी विषय पढ़ाए जाते हैं वह सब अंग्रेजी भाषा में ही पढ़ाए जाते हैं। पढ़ाई करने के लिए पहले विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा सीखनी पड़ती है और फिर उसके बाद वह किसी अन्य भाषा में पढ़ाई कर सकते हैं। हिंदी को लेकर मानसिकता बदलनी होगी। हिंदी को कार्यालय भाषा के रूप में अपनाना होगा। हिंदी हर व्यक्ति को संस्कृति और देश के साथ जोड़ने का काम करती है। हिंदी को भी उतना ही सम्मान और महत्व मिले जितनी देश को दी जाती है।
- निवेदिता, हिंदी विभाग स्कॉलर जम्मू विश्वविद्यालय
देश की भाषा और अपनी भाषा है हिंदी, जो व्यवस्थित भाषा है। इसे जैसे बोला जाता है वैसे ही लिखा भी जाता है। हिंदी साहित्य बहुत ही विभिन्न रूप में देखने को मिलता है। वह व्यक्ति भारत को बिल्कुल नहीं जान सकता जो हिंदी भाषा नहीं बोलता है। सोशल मीडिया में आज युवाओं द्वारा हिंगलिश और अंग्रेजी का इस्तेमाल पोस्ट डालने के लिए सबसे अधिक किया जाता है, पर हिंदी की अपनी लिपि बहुत कम प्रयोग में लाई जाती है। युवाओं को हिंदी का महत्व समझना होगा। यह खुशी की बात है कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी को अहमियत मिल रही है।
- भगवती, हिंदी विभाग स्कॉलर जम्मू विश्वविद्यालय
हिंदी को पहले कभी इतनी ज्यादा अहमियत नहीं दी गई, पर आज के समय में लोगों को हिंदी के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा भी प्रयास किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पहले केवल उर्दू और अंग्रेजी का ही इस्तेमाल किया जाता था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से हिंदी को भी दर्जा मिलने लगा है और इसका इस्तेमाल भी होने लगा है। यदि हिंदी को और ज्यादा अहमियत और बढ़ावा मिलना चाहिए तो इसके लिए बेहद जरूरी है कि हिंदी पढ़ने और पढ़ाने वाले इसका ज्यादा प्रयोग करें और सबको जागरूक करें।
- ईशा वर्मा, हिंदी विभाग स्कॉलर जम्मू विश्वविद्यालय
देश में अंग्रेजी का प्रचलन हो गया है। लोगों ने खुद की मातृभाषा को छोड़कर दूसरों की भाषा को अपनाना शुरू कर दिया है। हमें समझना होगा कि हिंदी अपनी भाषा है, जिसके सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुड़ा है। हिंदी देश के साथ प्यार और संबंध को ज्यादा गहरा करती है। ज्यादातर आबादी को अच्छे से हिंदी बोलना और लिखना नहीं आती। लोगों को अंग्रेजी की ए, बी, सी तो आती है पर हिंदी का अपनी मातृभाषा का क, ख, ग नहीं आता। युवा पीढ़ी को हिंदी सीखने के प्रति करने पर ही बदलाव आएगा।
- मीनाक्षी, हिंदी विभाग , केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू
देश की बुनियाद ही हिंदी भाषा पर है। अंग्रेजी को अहमियत देकर हम नई पीढ़ी को हिंदी से दूर ले जा रहे हैं। हिंदी भारत की भाषा है। लोगों को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। हिंदी संपर्क भाषा है जो हर व्यक्ति को एक-दूसरे के साथ जोड़ने का काम करती है। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद तो और ज्यादा अनिवार्य हो गया है कि हिंदी को ज्यादा अहमियत दी जाए। हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जिसे हर कोई इस्तेमाल कर सकता है, अत: इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- अंजली, हिंदी विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू