जम्मू-कश्मीर में उर्दू, अंग्रेजी के साथ हिंदी, कश्मीरी और डोगरी को राजभाषा का दर्जा मिलने से लोगों और सरकार के बीच संवाद बढ़ेगा। साथ ही इन भाषाओं को प्रोत्साहन भी मिलेगा। केंद्र सरकार के इस फैसले का शहर के आम लोगों के साथ बुद्धिजीवियों ने भी स्वागत किया है। लोगों ने कहा कि इससे रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही साथ ही युवाओं में हिंदी और डोगरी के प्रति रुझान बढ़ेगा। रोजगार की चाह में युवा वर्ग डोगरी और हिंदी बोलने के साथ लिखेंगे और पढ़ेंगे भी। इन भाषाओं को नई उड़ान मिलेगी। सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल बढ़ेगा। आम लोग अपनी बात अपनी भाषा में सरकारी तंत्र तक बेहतर ढंग से रख सकेंगे।
डोगरी भाषा मां के समान
सरकार का यह फैसला स्वागत योग है। डुग्गर प्रदेश में डोगरी भाषा मां के बराबर है और सरकार का यह फैसला उसे उचित स्थान देता है। डोगरी के आधिकारिक भाषा बनने से लोगों और सरकार के बीच संवाद बढ़ेगा। डोगरी बोलने वाले के लिए बड़ा अवसर है। इससे रोजगार के माध्यम भी सृजित होंगे। सांस्कृतिक अकादमी की भी जिम्मेारी बढ़ेगी। पहले हमे डोगरी की जरूरत थी, लेकिन अब डोगरी को हमारी जरूरत होगी।
-पद्मश्री बलवंत ठाकुर, भारत सरकार के सांस्कृतिक प्रतिनिधि, जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)
डोगरी को मिलेगी नई उड़ान
डोगरी भाषा को साहित्यिक अकादमी में मान्यता, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने से लेकर प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने तक का सफर काफी संघर्ष भरा रहा। उर्दू और अंग्रेजी के वर्चस्व के बीच क्षेत्रीय भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना सभी के लिए गर्व की बात है। डोगरी भाषा अब रोजगार से जुड़ गई है, जिससे इसको बढ़ावा मिलेगा। रोजगार की चाह में लोग डोगरी बोलेंगे, पढ़ेंगे और लिखेंगे।
-पद्मश्री जितेंद्र उधमपुरी
लोगों की भावनाओं को मिला सम्मान
हिंदी और डोगरी को उर्दू, कश्मीरी और अंग्रेजी के समकक्ष रखना सरकार का बहुत बड़ा कदम है। डोगरी से स्थानीय लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं और सरकार के इस कदम ने उनका सम्मान बढ़ाया है। डोगरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से आम लोग अपनी समस्याओं को सरकारी तंत्र तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। क्षेत्रीय भाषाओं को जानने वाले लोगों के लिए अब नए द्वार खुल गए हैं।
-डॉ. निर्मल विनोद, वरिष्ठ हिंदी और डोगरी लेखक
शिक्षा के क्षेत्र में होगा विकास
डोगरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में इसका विकास होगा। वर्तमान में डोगरी भाषा को उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाया जाता रहा है, लेकिन अब डोगरी स्कूली स्तर से पढ़ाई जाएगी। इससे बच्चों में डोगरी भाषा को लेकर रुचि बढ़ेगी। किसी भी भाषा का भविष्य उसे बोलने वाली नई पीढ़ी पर निर्भर होता है। डोगरी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से लोग इससे जुड़ेंगे।
-सुनीता भडवाल, साहित्य अकादमी में डोगरी भाषा के सलाहकार बोर्ड की सदस्य
हिंदी के प्रति बदलनी होगी सोच
हिंदी को सिर्फ आधिकारिक भाषा बनाने से कुछ नहीं होगा, इसको लेकर हमें अपनी सोच बदलनी होगी। आज भी प्रदेश में कुछ निजी स्कूलों में बच्चों को हिंदी में बात करने की इजाजत नहीं दी जाती है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश में अब अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व टूटेगा। हिंदी एक विपणन की भाषा है जो लोगों को बड़ी आसानी से जोड़ती है। भाषा हमारे भावों को प्रकट करती है।
-आरती देवी, एमफिल छात्रा, जम्मू विश्वविद्यालय
विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है हिंदी
हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। अभी तक प्रदेश में हिंदी को उचित स्थान नहीं मिला। हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का सरकार का कदम सराहनीय है। हिंदी भाषा अब रोजगार से जुड़ेगी, जिससे युवाओं का रुझान हिंदी को लेकर बढ़ेगा। यह फैसला केवल कागजों तक सीमित न रहना चाहिए। इसमें युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा होने चाहिए।
-सोफिया सलाथिया, शोधार्थी, जम्मू विश्वविद्यालय
हिंदी का बढ़ेगा रुतबा
राजभाषा का दर्जा मिलने से सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में हिंदी भाषा का इस्तेमाल बढ़ेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हिंदी भाषा के रोजगार से जुड़ने से युवाओं का इसके प्रति रुझानअ धिक बढ़ेगा। वर्तमान समय में स्कूली बच्चे हिंदी को अपना सबसे कमजोर विषय मानते हैं। इसका कारण हिंदी को लेकर स्कूली स्तर पर्याप्त कार्य नहीं हो पाया है। इसके लिए प्रयास जारी रहने चाहिए। घर से लेकर स्कूल तक इसके लिए माहौल तैयार करना होगा।
-संतोष देवी, एमफिल छात्र जम्मू विश्वविद्यालय