किसी भी बात को आसानी से जनमानस तक पहुंचाने के लिए हिंदी सबसे सरल भाषा है। समाज और लोगों की समस्याओं को उजागर करने में हिंदी अहम भूमिका निभाती है। साहित्य और रंगमंच से जुड़े लोगों ने कहा कि हिंदी भाषा को सिर्फ बातों से बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए युवाओं का हिंदी साहित्य से जुड़ाव जरूरी है, प्रदेश में हिंदी साहित्य के पुस्तकालय खुलने चाहिए। रंगमंच में हिंदी का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी भाषा को लेकर सेमीनार और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन होना चाहिए।
रंगमंच और हिंदी भाषा का संबंध घनिष्ठ मित्रों की तरह है। रंगमंच के माध्यम से समाज और लोगों से जुड़ी समस्याओं को उजागर करने में हिंदी भाषा बड़ी भूमिका निभाती है। हिंदी भाषा का रंगमंच में लंबे समय से उपयोग हो रहा है, लेकिन इसे और बढ़ाने की जरूरत है। पश्चिम देश अपनी भाषा और संस्कृति को छोड़े बिना दूसरे देशों की भाषा और संस्कृति को अपनाते हैं, हमें भी ऐसा ही करना चाहिए। हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
-रोहित वर्मा, युवा रंगकर्मी
राजभाषा का दर्जा मिलने से अब हिंदी के प्रति लोगों में आकर्षण बढ़ेगा। किसी भी योजना या संवाद को जनमानस तक पहुंचाने में सरल भाषा की अहम भूमिका होती है और हिंदी ही एक मात्र वह भाषा है जो इस कार्य को कर सकती है। प्रदेश में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। सरकार को भी चाहिए कि वह कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में हिंदी भाषा का अधिक से अधिक उपयोग करे, ताकि जनमानस इससे लाभान्वित हो सके।
-पंकज खजूरिया, लेखक
हिंदी को सिर्फ बातों से बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए विशेषकर युवाओं का हिंदी साहित्य से जुड़ाव जरूरी है प्रदेश में ऐसे पुस्तकालय खुलने चाहिएं, जहां हिंदी भाषा की पुस्तकें, पत्रिकाएं और साहित्य छात्रों और लेखकों के लिए उपलब्ध हों। हिंदी साहित्य की पुस्तकों के प्रकाशन को भी बढ़ाना होगा। स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी को लेकर सेमिनार और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन करना होगा। छात्र, शोधार्थियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।
-माधवी देवी, पार्षद