जम्मू-कश्मीर में कोविड टीकाकरण अभियान जारी है। तीसरी लहर पर लगभग नियंत्रण पा लिया गया है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण ने बेहतर ढंग से सुरक्षा कवच का काम किया है। प्रदेश के अधिकांश घरों में बुजुर्गों से लेकर बच्चों ने टीके की खुराक ले ली है। इसमें उम्रदराज लोगों ने एहतियाती डोज भी ली है। टीके की खुराक लेकर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
तालाब तिल्लो निवासी संजीव वर्मा ने बताया कि उनके परिवार के सभी सदस्यों ने कोविड टीके की खुराक ली है। प्रदेश में कोविड ने कई बार दस्तक दी, लेकिन टीके से उनका बेहतर बचाव हुआ। टीके की दोनों खुराक लेकर खुद को सुरक्षित मानते हैं। तीसरी लहर में टीकाकरण ने बेहतर बचाव किया है। इसमें अधिकांश लोग संक्रमण की चपेट में आए, लेकिन टीके की खुराक लेने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति अधिक बिगड़ी नहीं।
उनकी पत्नी वीनू वर्मा ने कहा कि टीके की खुराक लेने से पहले कुछ भ्रांतियां जरूर थीं, लेकिन बाद ऐसा कुछ महसूस नहीं हुआ। टीका लगाने के बाद स्वस्थ हैं और दिनचर्या की सामान्य गतिविधियां कर रही हैं। टीके से ही कोविड जैसी संक्रमित बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। करोड़ों की आबादी वाले भारत देश में टीकाकरण से ही कोविड पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली है। बेटी रिधिमा ने कहा कि परीक्षा के दौरान टीके की खुराक लेने से पहले थोड़ा डर लग रहा था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैं पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हूं। अब मैं बेहतर ढंग से परीक्षाएं दे पा रही हूं।
टीकाकरण में महिलाएं भी रहीं आगे: शालिनी
पक्की ढक्की निवासी गगनदीप ने बताया कि कोविड टीके की दोनों खुराक ले ली हैं। कोविड के दौरान कुछ शारीरिक समस्याएं आईं, लेकिन अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। पत्नी शालिनी ने भी टीके की दोनों खुराक ली हैं। उनका कहना है कि टीकाकरण में महिलाएं भी आगे रही हैं। इसी से सामुदायिक स्तर पर कोविड से बचाव संभव हुआ है। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हुई उनकी माता सुदर्शना देवी ने कहा कि खासतौर पर बुजुर्गों के लिए कोविड टीकाकरण वरदान साबित हुआ है। इस टीके से उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ी है।