रियासत में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में यदि अथारिटी ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन न किया तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
जनहित याचिका में भूमाफिया और राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अफसरों व पुलिस अधिकारियों द्वारा मिलीभगत कर लाखों कनाल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने नाराजगी जताई है।
प्रथम कनिष्ठ न्यायाधीश मोहम्मद याकूब मीर और न्यायाधीश बीएस वालिया की खंडपीठ ने अथारिटी की ओर से कोर्ट के आदेश को गंभीरता से न लिए जाने को गंभीरता से लिया है।
खंडपीठ ने कहा कि इस संबंध में छह मई 2015 और 26 अक्तूबर 2015 को कोर्ट ने निर्देश दिए थे। लेकिन राजस्व विभाग अवैध कब्जा हटाने के लिए बनाए गए तंत्र के संबंध में रिपोर्ट पेश करने में असफल रहा।
अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के लिए राजस्व विभाग को छह सप्ताह का समय देते हुए अदालत ने कहा कि असफल रहने पर अथारिटी के खिलाफ गंभीर नोट लिया जाएगा। इसके अलावा खंडपीठ ने मामले में नियम तय करने की चेतावनी भी दी। इतना ही नहीं, अफसर की व्यक्तिगत उपस्थिति अपरिहार्य है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील एसएस अहमद ने कहा कि रियासत में 20 लाख कनाल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। जिला स्तर पर अतिक्रमणकारियों की सूचियां तैयार की गईं।
अदालत ने राजस्व विभाग को आदेश दिए थे कि कब्जे वाली जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए तंत्र स्थापित कर जमीन छुड़ाई जाए। कब्जा करने वालों को राजनीतिज्ञों का संरक्षण प्राप्त है।
अतिक्रमण हटवाने के लिए राज्य सरकार भी गंभीर नहीं है। वकील ने अपील की कि अथारिटी को तय समय सीमा के अंदर अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सरकारी जमीन मुक्त करवाई जा सके।
एएजी एहसान मिर्जा के स्थान पर अदालत में उपस्थित एडवोकेट एहतशाम भट ने अनुपालन रिपोर्ट के लिए कोर्ट से कुछ और समय देने की मांग की। जेएनएफ