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गृहमंत्री राजनाथ के साथ कश्मीर आ रही सर्वदलीय समिति के सामने हैं कई मुश्किलें

Fri, 02 Sep 2016 11:04 AM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
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राजनाथ सिंह - फोटो : PTI
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घाटी में बिगड़े माहौल के बीच शांति प्रयासों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आ रही सर्वदलीय समिति से समस्या का हल निकल पाना मुश्किल लगता है।
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शांति बहाली की कोशिशें अब तक बेअसर रही हैं। अलगाववादी सर्वदलीय समिति के लिए चुनौती बन सकते हैं। सर्वदलीय समिति ने अलगाववादियों से मिलने के किसी कार्यक्रम से इनकार किया है तो हुर्रियत ने भी बातचीत के लिए आगे आने से अनिच्छा जताई है। विपक्ष अलगाववादियों से बातचीत करने पर अड़ा हुआ है।

सर्वदलीय समिति की चार एवं पांच सितंबर के दौरे को देखते हुए राजनीतिक दलों की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।

कई पार्टियां अलगाववादियों से बात की कर रहीं वकालत

अलगाववादी नेता ग‌िलानी - फोटो : Amar Ujala
कांग्रेस सहित घाटी आधारित पार्टियां लगातार हुर्रियत तथा अलगाववादियों से बातचीत की वकालत कर रही हैं। इनका कहना है कि अलगाववादियों तथा मुख्य धारा से अलग पार्टियों को बातचीत में शामिल किए बगैर बात नहीं बनेगी। चूंकि अलगाववादी लगातार कश्मीर समस्या को उठाते रहे हैं।

इस वजह से उन्हें अटल सरकार की तरह बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए। कश्मीर की राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि  पिछले 55 दिनों से अलगाववादियों ने बंद का आह्वान किया है जिसका व्यापक असर रहा है। इस वजह से उनकी बातें भी सुनी जानी चाहिए। 

विपक्ष का कहना है कि उनके दबाव पर ही घाटी में सर्वदलीय समिति का फैसला लिया गया है। इसलिए अलगाववादियों को बातचीत में शामिल करने की उनकी मांग को तरजीह दी जानी चाहिए। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद तथा पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलगाववादियों से बात करने के पक्ष में हैं।

सीपीआई (एम) के विधायक मो. यूसूफ तारिगामी बिना शर्त सभी पक्षों से बात करने की मांग पर अड़े हैं। नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव तथा विधायक अली मोहम्मद सागर तो अलगाववादी ही नहीं बल्कि आतंकियों से भी बातचीत के हिमायती हैं। उनका कहना है कि इससे असल समस्या सामने आ सकती है।  
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​घाटी में चौथी बार आएगा सर्वदलीय दल 

घाटी में हिंसा - फोटो : PTI
आतंकवाद से अशांत हुई घाटी की जमीनी हकीकत जानने के लिए वर्ष 1990 में पहला आल पार्टी डेलीगेशन भेजा गया। जनवरी महीने में वीपी सिंह सरकार ने उप प्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल के नेतृत्व में सर्वदलीय दल भेजा जिसमें राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज शामिल थे।

वर्ष 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन के दौरान केंद्रीय सरकार ने आल पार्टी डेलीगेशन भेजा। दल ने तमाम सियासी दलों के नेताओं से मुलाकात की।

वर्ष 2010 में तुफेल मट्टू की मौत से भड़की हिंसा के बाद तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में दल घाटी भेजा गया। सरकार ने शांति बहाली के लिए आठ सूत्री फार्मूला सुझाया।
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