जम्मू-कश्मीर के 31 अक्टूबर से केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) बनने के साथ राज्य प्रशासन ने सभी विभागों को 30 अक्टूबर तक अपने खातों को दुरुस्त करने और 6 नवंबर से पहले वित्त विभाग में इसका ब्योरा जमा करने का निर्देश दिए हैं। 5 अगस्त को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने, जम्मू और कश्मीर व लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की घोषणा की थी।
वित्तीय आयुक्त अरुण कुमार मेहता द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है भी विभाग लेखाकार जनरल के कार्यालय के साथ निर्धारित दिन से पहले अपने विभागों के खातों का मिलान करेंगे। इसके बाद लेफ्टिनेंट गवर्नर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की सलाह प्राप्त करने के बाद नियमों द्वारा काम को देखेंगे।
जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 67 (1) के संदर्भ में बताया गया कि जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश का समेकित कोष जम्मू राज्य के समेकित कोष का उत्तराधिकारी होगा। 31 अक्टूबर तक जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में जम्मू कश्मीर में प्राप्त सभी राजस्व या किसी भी मामले के संबंध में लेफ्टिनेंट गवर्नर जिसके संबंध में जम्मू और कश्मीर के संघ शासित प्रदेश की विधान सभा की शक्ति है कानून बनाने के लिए अधिकार होंगे।
आदेश के अनुसार इस तरह के समेकित निधि में से कोई भी धनराशि विनियोजित नहीं की जाएगी। इस तरह के कंसालिडेटेड फंड की कस्टडी, ऐसे फंड़स में पैसे का भुगतान, वहां से पैसे की निकासी और उन मामलों से जुड़े या अन्य सभी मामलों को लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विनियमित किया जाएगा। इसी तरह जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 68 (1) के अनुसार जम्मू और कश्मीर राज्य के सार्वजनिक खाते के उत्तराधिकारी जम्मू और कश्मीर के यूटी का सार्वजनिक खाता होगा।
कंसालिडेटेड फंड से मिलेगा राजस्व
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए कंसालिडेटेड फंड अधिकृत किया गया है। सेक्शन 67 (1) जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट 2019 के तहत वित्त विभाग की ओर से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लिए कंसालिडेटेड फंड अधिकृत किया गया है। 31 अक्टूबर 2019 से भारत सरकार की ओर से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू को दिए जाने वाले सभी राजस्व कंसालिडेटेड फंड से दिया जाएगा।