रियासत में विधानसभा चुनाव और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में उठापटक के बीच राज्य के युवा क्रिकेटरों ने रणजी ट्राफी में चालीस बार चैंपियन रही मुंबई को उसी के मैदान पर चित कर इतिहास रच दिया। इस साल आलराउंडर परवेज रसूल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया की तीस सदस्यों की संभावित सूची में शामिल होकर रियासत का गौरव बढ़ाया
नार्थ जोन विजय हजारे में भी राज्य के क्रिकेटर बेहतरीन प्रदर्शन करने में कामयाब रहे। हालांकि जेकेसीए में खींचतान से उन्हें घरेलू मैदान पर रणजी में उतरने का मौका नहीं मिल सका। गत सितंबर माह में बाढ़ से क्रिकेट को काफी नुकसान पहुंचा था। श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में कई दिन तक पानी खड़ा रहने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ।
जम्मू के जीजीएम साइंस कालेज की हास्टल ग्राउंड भी बारिश से प्रभावित हुई। जेकेसीए के पदाधिकारियों में खींचतान के चलते बाहरी राज्यों में कोचिंग कैंप लगाना भी एक कारण है। जीजीएम के साइंस कालेज की हास्टल ग्राउंड को बाढ़ से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। इस मैदान को कोचिंग कैंप के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता था। लेकिन पदाधिकारियों में खींचतान से ऐसा संभव नहीं हो पाया है।
जम्मू विंग की ओर से लगाए गए कोचिंग कैंपों को चेयरमैन से मान्यता नहीं दी गई। इस बीच हास्टल ग्राउंड पर चेयरमैन की ओर से कैंप लगाने की कोशिश की गई। लेकिन गेट पर ताला लगा देने से मामला बिगड़ गया। जिससे जम्मू में एक मैदान होते हुए भी कोचिंग कैंप को मोहाली में शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच बाढ़ से पहले ही घरेलू मैदानों पर राज्य से चार रणजी मुकाबलों की मेजबानी छिन गई थी।
इस बार नार्थ जोन में राज्य टीम ने दिल्ली, सर्विसेज और हरियाणा को पछाड़कर इतिहास रचा। यह प्रदर्शन यही नहीं सीमित नहीं रहा और राज्य के धुरंधरों ने रणजी ट्राफी ग्रुप ए में मुंबई को पछाड़कर नया इतिहास रचा। इस सारे प्रदर्शन में जेकेसीए की चीफ कुर्सी पर बैठे स्लो लेफ्ट आर्म स्पिनर से विख्यात सुनील जोशी की भूमिका भी अहम रही।
इस सीजन अब तक जहां राज्य के युवा क्रिकेटरों को क्रिकेट ढांचे से महरूम रहना पड़ा वहीं राष्ट्रीय स्तर पर जेएंडके का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।