विधान परिषद में अल्पमत में चल रही पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार को बहुमत वाले विपक्ष ने वीरवार को तीन निजी सदस्य प्रस्ताव वोटिंग में पारित करवा लिए। सरकार की ओर से मंत्रियों की पूरी टीम, जिसमें शिक्षा मंत्री नईम अख्तर, संसदीय मामलों के मंत्री बशारत बुखारी, राजस्व मंत्री जावेद मुस्तफा मीर, पीएचई राज्य मंत्री अब्दुल मजीद पड्डर, वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने विपक्ष को वोटिंग न करवाने का आग्रह भी किया।
इसके बावजूद विपक्ष ने वोटिंग करवाकर सरकार को उठने ही नहीं दिया। नेकां सदस्य डा. शहनाज गनेई के अंतर्राष्ट्रीय सीमा और एलओसी के करीब रहने वाले सीमांत इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पांच मरला प्लाट देने का निजी सदस्य प्रस्ताव पेश किया। सरकार की ओर से राजस्व मंत्री जावेद मुस्तफा मीर और वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने कहा कि सरकार इस मसले पर संजीदा है। मंडलायुक्तों को प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। बहरहाल सीमांत क्षेत्रों के मकानों को भी खाली नहीं छोड़ा जा सकता। मंत्रियों ने नेकां सदस्य से अपनी निजी सदस्य प्रस्ताव वापस लेने का आग्रह किया।
नेकां सदस्य के वोटिंग पर जोर देने पर उनका यह प्रस्ताव 12-10 वोटों के अंतर से मंजूर हो गया। नेकां सदस्य डा. बशीर अहमद वीरी का रियासत में मौसम के बदलाव को देखते हुए बाढ़, भूस्खलन आदि खतरों के मद्देनजर वैज्ञानिक आयोग के गठन और केंद्र सरकार से वैकल्पिक फ्लड चैनलों के निर्माण के निजी सदस्य प्रस्ताव पर भी शिक्षा मंत्री नईम अख्तर और पीएचई राज्य मंत्री अब्दुल मजीद पड्डर के आग्रह के बावजूद वोटिंग हुई और नेकां सदस्य का प्रस्ताव 13-11 वोटों के अंतर से मंजूर हो गया।
कांग्रेस सदस्य जुगल किशोर शर्मा का चिनाब दरिया के आसपास सुरक्षा बांधों पर करोड़ों की राशि खर्च करने के बावजूद किश्तवाड़, डोडा, रामबन, रियासी और अखनूर आदि में बाढ़ से भारी नुकसान की विजिलेंस जांच करवाने का निजी सदस्य प्रस्ताव भी वोटिंग में मंजूर हो गया। हालांकि संसदीय मामलों के मंत्री बशारत बुखारी और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कांग्रेस सदस्य को आश्वासन दिया कि सरकार इस मामले में विपक्ष के साथ हैं और निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। बाढ़ के कारणों की भी पूरी जांच होगी। इसके बावजूद प्रस्ताव पर वोटिंग करवाने के कांग्रेस सदस्य के जोर के बाद यह प्रस्ताव भी 13-09 से मंजूर हो गया।
बाढ़ पीड़ितों के लिए दो पैकेज रखे गए
राहत व पुनर्वास मंत्री सैयद बशरत बुखारी ने विधानसभा में बताया कि सितंबर 2014 में आई बाढ़ के प्रभावितों के लिए केंद्र के समक्ष दो राहत व पुनर्वास पैकेज रखे गए हैं। एक विशेष पैकेज और दूसरा स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) नार्म पर है। एसडीआरएफ के तहत 2926.11 करोड़ रुपये मांगे गए थे। इसमें से 1566 करोड़ रुपये अस्थायी बहाली के लिए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च स्तरीय कमेटी ने 1602.56 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इसमें से पांच सौ करोड़ रुपये भारतीय वायुसेना के लिए हैं, जबकि 1102.56 करोड़ शेष हैं।
मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ के तहत बकाया राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को कहा गया है। स्पेशल पैकेज के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नीति आयोग को क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा योजना व विकास विभाग की ओर से भी नीति आयोग को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। खासबात यह है कि एसडीआरएफ नार्म के तहत क्षतिग्रस्त ढांचे के हुए मूल्यांकन से कश्मीर घाटी के बाढ़ पीड़ित संतुष्ट हैं।
हालांकि मंत्री ने स्वीकार किया कि एसडीआरएफ के तहत मिली राहत की मात्रा से लोग जरूर असंतुष्ट हैं, क्योंकि आवास निर्माण का खर्च काफी मंहगा हो चुका है। पूरे राज्य के बाढ़ पीड़ितों को सीएपीडी विभाग के मार्फत एक जैसा छह माह का राशन मुफ्त में दिया गया है।