हवाई कंपनियों द्वारा पैसेंजर से अत्यधिक किराया वसूले जाने के संबंध में चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष वाईवी शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विमान कंपनियों को हलफनामा दायर कर जवाब देने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने विमान कंपनियों व प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए पांच सप्ताह का समय दिया है। याचिका में कहा गया कि विभिन्न हवाई कंपनियों द्वारा यात्रियों से न्यूनतम व अधिकतम किराया वसूलने के पीछे के तर्क के बारे में जानकारी मांगने की अपील की थी।
चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि एयरक्राफ्ट नियम 1937 के नियम 135 में 16 अप्रैल 2009 को हुए संशोधन के तहत एयरलाइंस कंपनियों के किराये संबंधी तर्क पूछा जाना जरूरी है।
चर्चा में यह भी सवाल उठा कि कोई ट्रेवल एजेंट किसी विमान कंपनी से बड़ी मात्रा में टिकट खरीदने के बाद उसे मनमानी कीमत पर बेच सकता है? साथ ही नियम 135 (1) के तहत एयर फेयर तय करने के मामले को भी केस में जोड़ना चाहिए।
केस के प्रतिवादी एयर इंडिया द्वारा दिए गए जवाब में किराए की अलग-अलग श्रेणी के बारे में दी गई जानकारी तय की जा सकती है या नहीं। इन तमाम सवालों पर अदालत ने प्रतिवादी से पांच सप्ताह के अंदर हलफनामा दायर करने को कहा है।