आरएस पुरा। उपजिले में बारिश से खराब हुई धान की फसल का जायजा लेने शनिवार को तहसीलदार गनदीप कुमार सुचेतगढ़ पहुंचे। उनके साथ कृषि विभाग के अधिकारी भी रहे। इस दौरान खेतों में काट कर रखी गई धान की फसल को बारीकी से देखा गया।
गत माह बारिश व ओलावृष्टी से किसानों द्वारा खेतो में लगाई धान खडी होने पर खराब होने प्रशासन द्वारा सुध नही ली गई। घराना पंचायत के सरपंच गुरुदयाल सिंह मोजत्रा के आग्रह पर तहसीलदार तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने पंचायत का दौरा कर बारिश के कारण बरबाद हुई धान की फसल का जायजा लिया। सरपंच ने इस मौके पर अधिकारियों को बताया कि बारिश के कारण किसानों की फसल पूरी तरह से बरबाद हो गई। ऐसे में अधिकारी जल्द से जल्द किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त जम्मू को सौंपे। सरपंच ने कहा कि बारिश के कारण सबसे अधिक नुकसान घराना पंचायत के किसानों को हुआ है। दो दिन तक हुई बारिश का सारा पानी खेतों में जमा होने के कारण क्षेत्र की सौ प्रतिशत फसल पानी में डूब चुकी है। सरपंच ने मांग करते हुए कहा कि किसानों को प्रति कनाल 10 हजार रुपये मुआवजा मुहैया कराया जाए।
किसान रमेश लाल, सरदारी लाल आदि ने भी नुकसान के बारे में अधिकारियों को बताया कि बारिश के कारण उनकी धान की फसल बरबाद हो गई है। अब खेतों में अधिक पानी जमा होने पर गेहूं की बिजाई भी नहीं कर पा रहे हैं। इस बार उन पर कुदरत की दोहरी मार सहनी पड़ रही है। किसानों ने जायजा लेने पहुंचे अधिकारियों से कहा कि वह जल्द से जल्द नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपे ताकि उन्हें जल्द सरकार की तरफ से मुआवजा मिल सके। तहसीलदार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनके नुकसान की सूची तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। इस दौरान कृषि विभाग के एसडीएओ रोशन लाल भगत, ईओ अश्वनी जोजरा सहित राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
आरएस पुरा। बारिश से खराब हुई किसानों की धान की फसल का मुआवजा मुहैया कराए जाने की मांग की गई है। आरोप लगाया गया कि पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और बारिश उसके बाद अब दो दिन हुई जबरदस्त बारिश के बाद भी किसानों की सुध नहीं ली गई है। इस बारिश में किसानों की धान की फसल जहां नष्ट हुई हैं वहीं अब गेहूं की फसल की बिजाई करने में भी दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं।
जम्मू-कश्मीर बासमती राइस ग्रोवर्स चेयरमैन चौधरी देवराज, प्रधान चौधरी कृष्ण सिंह ने शनिवार को प्रेसवार्ता में कहा कि बारिश के कारण सीमावर्ती किसानों की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। सरकार की ओर से किसानों की सुध लेने के लिए कोई अधिकारी उनके बीच नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्द से जल्द खराब हुई फसलों का सर्वे कराना चाहिए ताकि किसानों को उनकी खराब हुई फसलों का मुआवजा मिल सके। बारिश के कारण जम्मू संभाग के आरएस पुरा, सांबा, कठुआ सहित कई क्षेत्रों में किसानों की फसल नष्ट होने पर सांसद जुगल किशोर शर्मा ने संसद में किसानों की बात रखी। इस बीच दो दिन हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी।
एसोसिएशन के चेयरमैन चौ. देवराज ने कहा कि फसल खराब होने पर व्यापारी वर्ग द्वारा निकाला भाव काफी होने पर सरकार से मांग करते हुए कहा कि बासमती के दाम कम से कम प्रति क्विंटल पांच हजार रुपये तय किए जाएं। इस अवसर पर एसोसिएशन के कई सदस्य सहित किसान भी मौजूद रहे।
सर्वे कराकर दिया जाए मुआवजा
अखनूर। क्षेत्र में मूसलाधार बारिश होने पर गेहूं और धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि सर्वे करके नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए।
दो दिन में भारी बारिश होने पर खेत पानी से भर गए हैं। इस पर गेहूं की खड़ी फसल गीली होने पर खराब होने की स्थिति में आ गई है। वहीं घान की फसल की यही स्थिति है। कटी फसल खराब हो गई है। किसान रामपाल ने बताया कि दो दिन से जरूरत से ज्यादा बारिश होने पर गेहूं की फसल खराब होने के कगार पर आ गई है। इस समय गेहूं की फसल को धूप की जरूरत है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर फसल खराब हो गई है। कंडी क्षेत्र के किसान बोधराज ने बताया कि गेहूं की फसल लगाने पर एक दो माह के बाद बारिश होती थी। मगर इस बार बारिश पहले होने पर फसल को काफी नुकसान हुआ है। किसानों को अपने परिवार के जीविका की चिंता सताने लगी है। किसान सतपाल ने बताया कि धान की फसल कटी होने पर खेतों में पानी भार जाने से फसल खराब हो गई है।
बची धान फसल तबाह, गेहूं की रोपाई पर संशय
43 घंटो की लगातार बारिश के बाद निखरी धूप
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। दो दिन की बारिश के बाद शनिवार को हल्की धूप खिली। इस बीच किसानों में धान की बची फसल के बरबाद होने की आशंका बनी हुई है। इसके साथ ही खेतों में पानी भरा होने के कारण गेहूं की रोपाई पर संशय बना हुआ है।
किसानों के अनुसार सबसे अधिक और गहरे जख्म इस बारिश ने हमें दिए, जिसकी भरपाई हम नहीं कर सकेंगे। किसान मोहन लाल, तरलोचन सिंह, अतर सिंह, बाबू राम, निरंजन सिंह और कुलदीप राज आदि का कहना है कि बीते दिनों लगातार धूप में निखार रहने से खेतों से नमी लगभग खत्म हो चुकी थी, जिससे शेष धान की फसल को समेटने और गेहूं की फसल की बिजाई में काफी मदद मिल सकती थी, मगर वीरवार से शुरू हूई बारिश ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पड़ी काटी गई धान फसल पानी में डूब चुकी है। जो लगभग बेकार हो चुकी है। पहले कुछ हद तक गेहूं फसल रोपाई की थोड़ी बहुत आस बनी थी वह भी इस बारिश के बाद लगभग खत्म हो चुकी है। लगातार हुई इस बारिश से क्षेत्र से गुजरने वाले सभी छोटे बडे़ नालों में भी जल भराव हो चुका है।
किसान बरसीम की बिजाई में जुटे
बिश्नाह। मौसम साफ होने के बाद किसान खेतों में जमा पानी निकालने के बाद बरसीम की खेती में जुट गए। कनहाल गांव के किसान विजय, पटियाडी गांव के कुलदीप कुमार, चक अवतारा के मोहनलाल ने बताया कि भारी बारिश के बाद खेत ऐसे हैं कि पानी के कारण उनकी उपजाऊ होने में काफी दिन लगेंगे। इस कारण उन्होंने खेतों में गेहूं की बिजाई के बजाय बरसीम की बिजाई शुरू की है। बरसीन जिन खेतों में पानी भी गिरा होगा उनमें भी निकल आता है। इन खेतों में अब लगातार 20 दिन धूप भी निकले तो भी गेहूं नहीं लग पाएगा। लिहाजा अब किसान ज्यादातर खेतों में बरसीन सरेया की खेती में जुट गए हैं। ब्यूरो