धान के खेत में कीटनाशक का छिड़काव करता किसान।
ज्यौड़ियां। खौड और ज्यौड़ियां क्षेत्र में धान की फसल की रोपाई का काम लगभग खत्म हो गया है। किसान अब फसल की देखभाल में जुटे हैं। पलांवाला क्षेत्र में धान की रोपाई का काम किसानों की तरफ से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने पर बीच में रोक दिया गया। अब पानी मिलने पर रोपाई का काम अंतिम चरण में है।
खौड़ तथा ज्यौड़ियां क्षेत्र में जिन किसानों ने धान की रोपाई किए 20 से 25 दिन हो गये हैं, वह किसान भाई कृषि विभाग से सलाह लेकर फसल में घास नहीं फैलने को लेकर खेतों में छिड़काव कर रहे हैं। इस विषय में किसान पवन चौधरी, अशोक कुमार तथा बचन सिंह ने बताया कि धान की रोपाई खत्म है और अब हम फसल को छिड़काव कर रहे हैं। फसल की बिजाई या रोपाई से पहले कृषि विभाग किसानों को जागरूक करता है या नहीं पूछने पर किसानों ने बताया कि वैसे तो हम लोग खुद ही समय-समय पर फसल की देखदेख करते हैं, लेकिन फिर भी हमें अगर कोई फसल में बीमारी दिखे तो हम लोग कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर अधिकारियों से मदद लेते हैं। किसानों ने बताया कि ज्यादातर किसान तो अपने बुजुर्गों के बताए नुस्खे पर ही चलकर खेतों में काम करते हैं।
धान की फसल के पौधे को बीमारी से बचाए रखने और किसान भाई अच्छी पैदावार ले सकें, को लेकर एग्रीकल्चर एक्सटेंशन अधिकारी डॉक्टर संजीव चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में सभी किसान भाई धान की रोपाई का काम खत्म कर चुके हैं और अब फसल को देखभाल की जरूरत है। उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने फसल की रोपाई किए बीस से पच्चीस दिन हो गए हैं। वह फसल को पोस्ट इमर्जेंसी स्प्रे कर सकते हैं। इसमें वह नोमनि गोल्ड का छिड़काव 100 एमएल प्रति एकड़ कर सकते हैं।
डाक्टर संजीव ने बताया कि किसान एक बात याद रखें कि छिड़काव करने से पहले खेत से पानी निकाल लें और छिड़काव के दो या तीन दिन के बाद फिर से पानी लगा दें। फसल की रोपाई के दो या तीन सप्ताह बाद धान के पौधे के नीचे वाले पते अगर रूसटी बरोन पड़ने लगें तो हमें समझ लेना चाहिए कि यह जिंक की कमी के कारण हो रहा है। फसल को बचाने के लिए जिंक सल्फेट मोनोहाईड्रेट का छिड़काव प्रति एकड़ सोलह किलो करना चाहिए।