दो फसलों की बरबादी देख चुके किसानों के सामने मानसून में सूखे की भविष्यवाणी चुनौती बन गई है। पहले बेमौसम बारिश और अब सूखे के डर से किसान तबका सहम गया है। किसानों और किसान संगठनों ने मांग उठाई है कि खरीफ फसलों का अभी से बीमा किया जाए, ताकि सूखे की स्थिति में किसानों को राहत मिल सके, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं है।
सरकार ने अभी फसलों का बीमा करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। राइस ग्रोवर एसोसिएशन के प्रधान चौधरी देव राज का कहना है कि पहले से किसान दो फसलों का नुकसान झेल चुके हैं। जिसका मुआवजा अब तक नहीं मिला। ऐसे में अगली फसल पर सूखे का साया है, जो बहुत डरावना है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि खरीफ की फसलों का बीमा किया जाए, ताकि किसानों को फसलें खराब होने की स्थिति पर मुआवजा मिल सके।
किसान संघ के प्रधान तेजिंदर सिंह का कहना है कि खरीफ की फसल पानी पर निर्भर करती है। जब मानसून में बारिश नहीं होगी तो किसानों की फसल बरबाद हो जाएगी। इसलिए बीमा आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग की भविष्यवाणी है कि इस साल मानसून कमजोर रहेगा। इसका असर फसलों पर पड़ना तय है।
कोई बीमा योजना नहीं
कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन का कहना है कि अगले साल फसलों की बीमा पॉलिसी लांच होगी, लेकिन इस वर्ष अभी तक कोई योजना नहीं है। जब योजना शुरू होगी तो राज्य के सभी जिलों को इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूखे की भविष्यवाणी है, इसके लिए सरकार कोई और उपाय निकालेगी।