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बाढ़ के बाद अब क्या रहेगी घाटी की किस्मत?

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रियासत में आई बाढ़ के बाद अब धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होती दिख रही हैं, बावजूद इसके अभी ऐसे बहुत से जख्म हैं जिन्हें भरने में बहुत समय लगेगा। माना जा रहा है कि आने वाले कई सालों तक घाटी को इस भयानक त्रासदी के असर से जूझना पड़ सकता है।
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सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि बाढ़ का नुकसान घाटी को कई स्तर पर हुआ है। बाढ़ के कारण सैकडों लोगों को अपनी जान तो गंवानी पड़ी ही है आर्थिक रूप से भी लोगों की कमर टूट गई है। वहीं सरकारी ढांचे को भी खासा नुकसान पहुंचा है।

अस्पताल, थाने, सरकारी कार्यालय, स्कूल-कालेज और पुरानी एंव एतिहासिक इमारतों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। ऐसे में इन सबको समय से दुरुस्त कर दोबारा पुराने स्वरूप में लौटाना प्रदेश और केन्द्र दोनों के समक्ष कड़ी चुनौती रहेगा। डालते हैं कुछ ऐसी ही चुनौतियों पर नजर जिनसे निपटना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
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पर्यटन उद्योग को उबरने में लगेगा समय

जम्‍मू-कश्मीर की कमाई का सबसे बड़ा जरिया यहां का पर्यटन उद्योग है। धरती का जन्नत कही जाने वाले जम्‍मू कश्मीर में काफी संख्या में दर्शनीय स्‍थल हैं। यही कारण है कि हर साल लाखों की संख्या में सैलानी छुट्टियां बिताने और दो पल के सुकून के लिए यहां आते हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित श्रीनगर ही सैलानियों का सबसे पसंदीदा स्‍थल रहा है।

खासकर यहां की डल झील हर आने वाले के आकर्षण का केन्द्र होती है। लेकिन बाढ़ ने श्रीनगर शहर को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया है। कई-कई फुट पानी भरा होने के कारण अधिकतर दर्शनीय स्‍थल तबाह हो चुके हैं। डल झील की स्थिति तो ऐसी है कि शायद ही अगले छह महीने तक कोई उधर का रुख करे।

झील में हर समय तैरती रहने वाली हाउस बोट और अधिकतर शिकारे बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। पर्यटकों को अपनी ओर लुभाने वाले शहर के अधिकतर होटलों में पानी निकलने के बाद कई कई फुट तक मिट्टी भरी हुई है। कुछ ऐसी ही हालत शहर के अन्य पर्यटन स्‍थलों की है।

बागबानी उद्योग को हुआ खासा नुकसान

पर्यटन के बाद बागबानी उद्योग रियासत की कमाई का दूसरा बड़ा जरिया माना जाता है। विश्‍वप्रसिद्ध सेब, अखरोट और बादाम आदि की पैदावार सालभर घाटी की कमाई का जरिया बनी रहती है। लेकिन बाढ़ के कारण बागबानी उद्योग भी काफी हद तक चौपट होकर रह गया है।

सबसे ज्यादा नुकसान सेब की फसल को हुआ। जानकारों के अनुसार कुछ ही दिनों में तैयार होने वाली करीब एक हजार करोड़ रुपये की सेब की फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई। इसके अलावा सेब के पेडों को भी खासा नुकसान पहुंचा है जिनसे अगले कुछ सालों तक फल आने की कोई उम्‍मीद नहीं है।

वहीं बादाम और बिल्कुल तैयार अखरोट की पैदावार को भी खासा नुकसान हुआ है। जम्‍मू कश्मीर चैंबर ऑफ कामर्स के अनुसार रियासत की बागबानी को हुए नुकसान की सप्लाई करने में अगले कई साल लग जाएंगे।
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इन्फ्रास्टक्चर को बहुत तगड़ा नुकसान

घाटी में आई बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान इन्फ्रास्टक्चर को हुआ है। जो काफी हद तक तबाही की भेंट चढ़ गया। पुरानी इमारतें, स्कूल-कालेज, बैंक-एटीएम, घर-मकान, सरकारी बिल्डिंग और दुकानें कई दिन 10-12 दिन फुट पानी में डूबे रहे, जिसके चलते ज्यादतर भवन क्षतिग्रस्त हो गए।

जो सही हैं उनमें घुसने की लोग हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं, पता नहीं कब कौन सा भवन किसकी जान ले ले। जानकारों के अनुसार बाढ़ के बाद अधिकतर भवन जीर्णशीर्ण अवस्‍था में पहुंच चुके हैं। प्रशासन भी ताकीद दे चुका है कि बिना जांच परख के किसी मकान और ‌बिल्डिंग में रहने न जाएं।

ऐसी ही हालात जम्‍मू संभाग में भी है, जहां काफी मकानों को बाढ़ से क्षति पहुंची है। बाढ़ के चलते श्रीनगर का सचिवालय भी बुरी स्थिति में है। जिसमें कई दिनों की मशक्‍कत के बाद अभी पूरी तरह पानी नहीं निकाला जा सका है।
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