-उद्योगपतियों के जीएसटी रिर्टन और दावे हो रहे खारिज
-सरकार करे पंजाब के छह प्रतिशत मंडी टैक्स का भुगतान : एसोसिएशन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पहलगाम हमले के बाद बदले हालात में उद्योग जगत संकट में है। उद्योग एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से राहत के कदम उठाने की गुजारिश की है। उद्योगपतियों ने विभिन्न सरकारी विभागों को सामग्री की आपूर्ति की है। इसके भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। इससे जम्मू-कश्मीर के सूक्ष्म और लघु औद्योगिक क्षेत्र की परेशानियां बढ़ गई हैं। कोषागारों ने भी विभाग के भुगतान को रोक रखा है। औद्योगिक प्रतिनिधियों ने बताया कि कई इकाइयों ने विधिवत जीएसटी रिटर्न और दावे दाखिल किए हैं, लेकिन तकनीकी सीमाओं और कठोर कार्यान्वयन समयसीमा के कारण उनके दावों को अनुचित तरीके से खारिज कर दिया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेंद्र जैन ने कहा कि पंजाब से गेहूं खरीदने वाली जम्मू-कश्मीर की आटा मिलों पर पंजाब सरकार छह प्रतिशत का मंडी टैक्स लगा रही हैं। इस टैक्स से प्रदेश की आटा मिलों के लिए बाहरी आपूर्तिकर्ताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है। राज्य में गेहूं के आयात पर मंडी टैक्स की प्रतिपूर्ति सरकार को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर का सूक्ष्म और लघु औद्योगिक क्षेत्र प्रतिबद्ध सरकारी प्रोत्साहनों के लंबे समय तक वितरण न किए जाने के कारण गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है।
श्रमिकों के पलायन और परिवहन की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
जम्मू-कश्मीर के मौजूदा सूक्ष्म और लघु औद्योगिक क्षेत्र को सरकार के उनके प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध के हालात में उद्योगपतियों को श्रमिकों के पलायन, परिवहन की कमी के कारण अपनी इकाइयों को बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
विशेष केंद्रीय पैकेज देने में देरी
अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने टर्नओवर प्रोत्साहन योजना, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति और सरकार के जम्मू-कश्मीर विशेष केंद्रीय पैकेज-दो 2012 का हिस्सा घोषित तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी के तहत धनराशि जारी करने में देरी पर गंभीर चिंता जताई है। जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए टर्नओवर प्रोत्साहन का आंशिक संवितरण यानी पहले वर्ष के दावे का लगभग 11.1 प्रतिशत किया गया है। 2021-22, 2022-23 और 2023-24 की शेष अवधि के लिए दावे लंबित हैं, इससे परिचालन में व्यवधान की कमी हो रही है।